*सामाजिक सेवा संस्थान का जाड़े में नेकी का सिलसिला जारी*

रविंद्र कुमार,संपादक/ पटना /13 दिसंबर 2025 :: सर्दी की बढ़ती ठंड में गरीब बच्चों को गर्माहट पहुंचाने के लिए अनिवार सामाजिक सेवा संस्थान ने कुम्हरार धनुकी मोड़ स्थित अंतरज्योति बालिका विद्यालय में सैकड़ो छात्राओं को स्वेटर वितरित किए। 
संस्था अध्यक्ष एवं अधिवक्ता संजय कुमार सिंह के नेतृत्व में BJP दिव्यांग प्रकोष्ठ संयोजक गणेश कुमार, मीडिया प्रभारी शत्रुहन प्रसाद, कार्यकर्ता रीना सिन्हा, सावन कुमार ने स्कूल प्रबंधक शशी वर्मा व चंद्रशेखर प्रसाद के सहयोग से प्रत्येक बच्चे को स्वेटर पहनाया।

बच्चे खुशी से झूम उठे और इसके लिए संस्था के सदस्यों का धन्यवाद किया।
संजय कुमार सिंह ने बताया, “हर जाड़े में हम 20 से अधिक स्कूलों में 1000+ बच्चों को स्वेटर पहुंचाते हैं। यह हमारा वार्षिक अभियान है, जो शिक्षा को प्रोत्साहित करता है।”

शत्रुहन प्रसाद ने कहा, “संस्था पिछले 5 वर्षों से शिक्षा, स्वास्थ्य शिविर, नारी सशक्तिकरण और जागरूकता अभियानों में सक्रिय है।”
कुम्हरार जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में यह पहल गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है।

स्थानीय निवासी संतोष मंडल, राजू सिन्हा, बैलनाथ, जेपी रमण, राजीव रंजन सिंह व बच्चू सिंह ने संस्था की सराहना की।

संस्था ने आगामी महीनों में स्वास्थ्य जांच शिविर और ग्रीष्मकालीन शिक्षा सहायता की योजना बताई।
यह प्रयास बच्चियों को न केवल शारीरिक सुरक्षा देगा, बल्कि ग्रामीण लड़कियों की सरकारी स्कूल में उपस्थिति भी बढ़ाएगा।

#स्वेटर_वितरण #अंतरज्योति_बालिका_विद्यालय #अनिवार_सामाजिक_सेवा_संस्थान #BJP_दिव्यांग_प्रकोष्ठ #कुम्हरार_न्यूज #बच्चों_के_लिए_सेवा #पटना_सामाजिक_काम #जाड़े_में_गर्माहट
Author Profile
-
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
मो .9304238302
Latest entries
सम्मानOctober 26, 2026*बिना सरकारी सहयोग के समाज सेवा की मिसाल बनी ‘मगधांचल समग्र विकास समिति’, नई दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान*
पत्रकारिताOctober 22, 2026*भीड़, भगदड़ और प्रशासनिक नाकामी — क्या इसमें हमारी कोई जिम्मेदारी नहीं?*
अध्यात्मOctober 22, 2026*भोजपुरी स्टार रवि किशन का आध्यात्मिक संदेश: बोले—मुश्किल दौर से उबरने के लिए भगवान राम, श्री कृष्णा और शिव के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना जरूरी*
पत्रकारिताOctober 22, 2026*स्मार्टफोन क्रांति या डिजिटल अराजकता? रीलबाज़ों की भीड़ में दम तोड़ती पत्रकारिता और सोए हुए पत्रकार संगठन*
