October 9, 2026

*बिहार MSME नीति-2026 का हुआ लोकार्पण: सीएम सम्राट चौधरी ने 7,000 से अधिक लाभुकों के खातों में भेजी राशि, 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी बनाने का संकल्प*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

​👍​नई एमएसएमई नीति का आगाज: पटना के बापू सभागार में आयोजित ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ उन्मुखीकरण कार्यक्रम में ‘बिहार MSME नीति-2026’ का औपचारिक लोकार्पण किया गया।

👍​डीबीटी (DBT) से राशि हस्तांतरित: 7,000 से अधिक (7,136) चयनित नए लाभुकों के बैंक खातों में प्रथम किस्त (2-2 लाख रुपये) के रूप में लगभग 150 करोड़ रुपये सीधे ट्रांसफर किए गए।

👍​1 करोड़ परिवारों का लक्ष्य: राज्य सरकार ने बिहार के 1 करोड़ परिवारों को स्वरोजगार और उद्यम से जोड़कर ‘उद्यमी परिवार’ बनाने का संकल्प लिया।

👍​हर जिले में MSME केंद्र: स्थानीय स्तर पर उद्यमियों को तकनीकी सहायता, कागजी कार्रवाई और मार्गदर्शन देने के लिए प्रत्येक जिले में एमएसएमई सेंटर खोले जा रहे हैं।

👍​स्थानीय उत्पादन को प्राथमिकता: राज्य सरकार अपनी कुल सरकारी खरीद का 25% से 40% हिस्सा बिहार में उत्पादित वस्तुओं से ही करेगी।

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रविन्द्र कुमार,संपादक/​पटना,09 अक्टूबर 2026 ::​ बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बापू सभागार में उद्योग विभाग द्वारा आयोजित ‘मुख्यमंत्री उद्यमी योजना’ उन्मुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्य के औद्योगिक परिदृश्य को गति देने के लिए ‘बिहार MSME नीति-2026’ का लोकार्पण किया।

​कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्यभर के 7,000 से अधिक नवचयनित उद्यमियों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से पहली किस्त की राशि भेजी। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को अपना उद्योग या व्यापार शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें 5 लाख रुपये का सरकारी अनुदान (सब्सिडी) और 5 लाख रुपये का ब्याज-मुक्त ऋण शामिल है।

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​समारोह में उपस्थित उद्यमियों और युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य बिहार के युवाओं और महिलाओं को ‘रोजगार मांगने वाले’ के बजाय ‘रोजगार देने वाला’ (Job Creator) बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार के 1 करोड़ परिवारों को उद्यमी परिवार बनाना है ताकि युवाओं को आजीविका की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन न करना पड़े। 

​मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक इस योजना के जरिए अनुसूचित जाति/जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, महिलाओं तथा युवा वर्ग के 45,000 से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है। उद्यमियों के उत्पादों को बाजार देने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि बिहार में उत्पादित सामग्रियों की 25 से 40 प्रतिशत तक की खरीद राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा की जाएगी। साथ ही, जिला स्तर पर औद्योगिक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने हेतु हर जिले में विशेष MSME केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।

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🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​बिहार MSME नीति-2026 का शुभारंभ और 1 करोड़ परिवारों को उद्यम से जोड़ने का संकल्प राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की दिशा में एक साहसिक कदम है। लंबे समय से श्रम पलायन की चुनौती झेल रहे बिहार के लिए युवाओं को ‘नौकरी चाहने वाले’ के स्थान पर ‘नौकरी देने वाले’ के रूप में तैयार करना एक दूरगामी रणनीति है। हालाँकि, इस नीति की वास्तविक सफलता केवल शुरुआती किस्तों के वितरण पर नहीं, बल्कि निर्मित उत्पादों के लिए स्थायी बाजार (Marketing), लॉजिस्टिक्स ढाँचे और बैंक ऋणों की सुलभता पर निर्भर करेगी। यदि जमीनी स्तर पर नौकरशाही की अड़चनों को दूर कर इन सूक्ष्म व मध्यम उद्योगों को मजबूत बैकअप दिया जाता है, तो यह योजना निसंदेह ‘आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बिहार’ के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगी।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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