*महिला कॉलेज डालमिया नगर में संस्थापिका प्रिंसिपल स्व. सत्या शाही की प्रतिमा स्थापना की मांग को लेकर आर-पार की लड़ाई*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
👍प्रतिष्ठा का प्रश्न: महिला कॉलेज डालमिया नगर की प्रथम प्रिंसिपल स्वर्गीय सत्या शाही की प्रतिमा स्थापना की मांग।
👍प्रशासनिक लापरवाही: राजभवन के निर्देशों और प्रिंसिपल के आग्रह के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन पर फाइल दबाने का आरोप।
👍आर-पार की चेतावनी: एक महीने का अल्टीमेटम, मांग पूरी न होने पर जन आंदोलन की चेतावनी।
👍कानूनी दांव: मामले को लेकर अब माननीय उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी।
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रविन्द्र कुमार, संपादक /डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)/12 जुलाई 2026 :: महिला कॉलेज डालमिया नगर की संस्थापिका एवं प्रथम प्रिंसिपल स्वर्गीय सत्या शाही की प्रतिमा स्थापना को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। स्थानीय जनता द्वारा निर्मित प्रतिमा को कॉलेज परिसर में स्थापित करने की मांग को लेकर बुद्धिजीवियों और समर्थकों ने वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (आरा) प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

👍*क्या है पूरा मामला?*
जनता द्वारा तैयार की गई स्वर्गीय सत्या शाही की प्रतिमा को स्थापित कराने के लिए स्वामी विवेकानंद जयंती (12 जनवरी 2026) के अवसर पर डेहरी में कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा के समक्ष धरना दिया गया था। इसके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन भेजकर राजभवन सचिवालय में व्याप्त लापरवाही और वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया था। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. अशोक कुमार सिंह ने भी विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा था, साथ ही राजभवन से भी निर्देश जारी हुए थे। आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन निर्देशों को दरकिनार करते हुए फाइलों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया।

👍*जन-संघर्ष और कानूनी कदम*
इस उपेक्षा के बाद 9 जुलाई को पुनः महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर मामले की याद दिलाई गई है। इस संघर्ष में प्रमुख समाजसेवी प्रवीण कुमार श्रीवास्तव (मंटू), इंजीनियर विनय चंचल और समाजसेवी विकास कुमार सिन्हा ने रणनीति तैयार की है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि एक महीने के भीतर प्रतिमा स्थापना पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आरा स्थित विश्वविद्यालय मुख्यालय के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बड़ा जन-आंदोलन किया जाएगा।

साथ ही, मामले को महिला अधिकारों और सम्मान से जोड़ते हुए पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिवक्ता अनिरुद्ध वर्मा से इस संबंध में परामर्श लिया गया है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल एक प्रतिमा का प्रश्न नहीं, बल्कि महिला शिक्षा की नींव रखने वाली महान विभूति के सम्मान का प्रश्न है।

🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹
किसी भी शिक्षण संस्थान की संस्थापिका के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना न केवल परंपरा है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी होता है। महिला कॉलेज डालमिया नगर की प्रथम प्रिंसिपल स्वर्गीय सत्या शाही के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का उदासीन रवैया चिंताजनक है। जब राजभवन और स्थानीय स्तर से स्पष्ट अनुशंसाएं भेजी गई हैं, तो फिर फाइल का दफन होना प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। यदि शिक्षा के मंदिरों में ही महापुरुषों के सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को चाहिए कि वह अपनी साख बचाए और अविलंब इस मामले में संवेदनशील निर्णय लेकर प्रतिमा स्थापना का मार्ग प्रशस्त करे, अन्यथा यह मामला न्यायालय की दहलीज पर विश्वविद्यालय की छवि के लिए और अधिक हानिकारक सिद्ध होगा।
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