April 18, 2026

*मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लक्ष्य स्पष्ट है कि अब कोई बिहारी अपने घर में ही सम्मानजनक रोजगार पाए*

रविंद्र कुमार,संपादक/पटना / 30 अक्टूबर 2025 :: आज राष्ट्रीय जनता दल यूनाइटेड राज्य कार्यालय में “सोशल मीडिया संवाद” पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

जद (यू) राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने सोशल मीडिया संवाद करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने पिछले दो दशकों में रोजगार के क्षेत्र में ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है । 2005 से पहले का बिहार बेरोजगारी , पलायन और अव्यवस्था के लिए जाना जाता था । लेकिन आज 2025 का बिहार उद्यमिता , आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक रोजगार का उदाहरण बन चुका है ।

उन्होंने कहा कि जब 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सत्ता संभाली , उस समय राज्य की सबसे बड़ी चुनौती – भ्रष्टाचार , अव्यवस्था और बेरोजगारी थी । उस समय बिहार की बेरोजगारी दर 11.8 प्रतिशत थी । लेकिन सुशासन के पहले दौर , यानी 2005 से 2020 के बीच राज्य सरकार ने लगभग 8 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दीं । इन नियुक्तियों में पुलिस , शिक्षा , स्वास्थ्य , लोक निर्माण और ऊर्जा जैसे प्रमुख विभाग शामिल रहे ।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए मनरेगा और जीविका जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष औसतन 23 करोड़ मानव दिवस सृजित किए गए । इससे ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार और आय का स्रोत मिला । इस अवधि में राज्य की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर 10.5 प्रतिशत रही और प्रति व्यक्ति आय में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई ।

जदयू राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि युवाओं के सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री निश्चय योजना , स्वयं सहायता भत्ता योजना और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना जैसी योजनाएं शुरू की गईं । स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना से 5.2 लाख छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए सुलभ ऋण प्राप्त हुआ है ।

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2020 के बाद रोजगार सृजन का दूसरा दौर शुरू हुआ । सात निश्चय पार्ट-2 के अंतर्गत राज्य सरकार ने 10 लाख सरकारी नौकरियों और 10 लाख अन्य रोजगार अवसरों का लक्ष्य तय किया । अगस्त 2025 तक इनमें से 10 लाख सरकारी नौकरियां और 39 लाख रोजगार अवसर सृजित किए जा चुके हैं

 

राज्य की नई एमएसएमई नीति 2025 के तहत ₹42,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ , जिससे लगभग 5.1 लाख नई नौकरियां बनीं । बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण ने 20 औद्योगिक क्लस्टर स्थापित किए , जिनमें खाद्य प्रसंस्करण , वस्त्र , इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी सेक्टर प्रमुख हैं । पटना और भागलपुर में स्थापित आईटी पार्क और टेक्नोलाॅजी हब के जरिए अब तक 31 हजार युवाओं को रोजगार मिल चुका है ।

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत अब तक 1.8 लाख से अधिक युवाओं ने अपने व्यवसाय शुरू किए हैं । इस योजना में ₹10 लाख तक की सहायता दी जाती है , जिसमें ₹5 लाख अनुदान और ₹5 लाख ब्याजमुक्त ऋण होता है । महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में मुख्यमंत्री नारी सशक्तिकरण योजना और महिला उद्यमी योजना ने क्रांतिकारी बदलाव लाया है । इन योजनाओं से 1.5 लाख महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक अवसर मिले हैं । 2017 में जहां बिहार की महिला श्रम भागीदारी दर 23.3 प्रतिशत थी , वहीं 2025 में यह बढ़कर 41.7 प्रतिशत हो गई है ।

राज्य सरकार अब 2026 में जननायक कर्पूरी ठाकुर स्किल यूनिवर्सिटी शुरू करने जा रही है , जिसका लक्ष्य हर साल 5 लाख युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण देना है । आज पूरा बिहार गर्व के साथ कह सकता है कि 2005 का बिहार जहां गरीबी , बेरोजगारी और पलायन का प्रतीक था , वहीं 2025 का बिहार उद्यमिता , आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का प्रतीक बन चुका है । मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का लक्ष्य स्पष्ट है कि अब कोई बिहारी अपने घर में ही सम्मानजनक रोजगार पाए और बिहार की युवा शक्ति राज्य की सबसे बड़ी पूंजी बने.

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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