*मुंगेर में “दादा साहेब फाल्के की 156वीं जयंती” पर जुटा फिल्म जगत, ‘चार्ली चैप्लिन 2’ फेम हीरो राजन कुमार ने दी श्रद्धांजलि*

युधिष्ठिर महतो /मुंगेर (बिहार)/ 02 मई 2026 :: भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की 156वीं जन्म जयंती के अवसर पर मुंगेर के शादीपुर स्थित ‘बफ्टा’ (BAFTA) फिल्म स्टूडियो में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया। बिहार फिल्म एंड टेलीवीज़न आर्टिस्ट एसोसिएशन ट्रस्ट के अध्यक्ष और प्रसिद्ध अभिनेता हीरो राजन कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कलाकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सिनेमा के जनक को याद किया।
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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*विरासत को नमन*: मुंगेर के फिल्म कलाकारों ने दादा साहेब फाल्के के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें आधुनिक भारतीय सिनेमा का प्रेरणास्रोत बताया।
*ऐतिहासिक सफर*: वक्ताओं ने फाल्के साहब के 19 साल के करियर, 121 फिल्मों (26 शॉर्ट फिल्में शामिल) और उनके द्वारा झेले गए संघर्षों पर प्रकाश डाला।
*नारी शक्ति का उदय*: कार्यक्रम में बताया गया कि कैसे फाल्के साहब ने समाज की परवाह किए बिना दुर्गाबाई कामत और कमलाबाई गोखले को फिल्मों में लाकर महिलाओं के लिए अभिनय के द्वार खोले।
*पहली महिला संपादक*: सिनेमा जगत में फाल्के साहब की पत्नी सरस्वतीबाई के योगदान को याद किया गया, जो भारत की पहली फिल्म संपादक थीं।
*मुंगेर में फिल्म निर्माण की संभावनाएं*: हीरो राजन कुमार ने मुंगेर के ऐतिहासिक ‘लाल किला’ और अन्य स्थलों को फिल्म शूटिंग के लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन बताया।
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*विस्तृत समाचार रिपोर्ट: संघर्ष से शिखर तक का सफर*
*सिनेमा एक जुनून: ₹25 हजार से ₹3.5 अरब तक का सफर*
समारोह को संबोधित करते हुए हीरो राजन कुमार ने कहा, “आज भारतीय सिनेमा का कारोबार साढ़े तीन अरब के पार है, लेकिन इसकी नींव दादा साहेब ने महज 20-25 हजार रुपये की लागत से रखी थी। उनका जीवन हमें धैर्य और कर्मपथ पर डटे रहने की सीख देता है।” उन्होंने फाल्के साहब की अंतिम मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ और आखिरी फीचर फिल्म ‘गंगावतरण’ का भी उल्लेख किया।

*तकनीक और कला का संगम*
बफ्टा के कोषाध्यक्ष मधुसूदन आत्मीय और डॉ. उदय शंकर ने फाल्के साहब के प्रारंभिक जीवन पर चर्चा करते हुए बताया कि वे सिर्फ एक निर्देशक नहीं, बल्कि एक कुशल पेंटर, आर्किटेक्ट और फोटोग्राफर भी थे। सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स से शिक्षा प्राप्त फाल्के ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में फोटोग्राफर के रूप में भी काम किया था।

*पौराणिक कथाओं के जरिए जड़ों से जुड़ाव*
वरिष्ठ अभिनेता अमित कुमार ने कहा कि जब देश में पश्चिमी फिल्मों का प्रभाव था, तब फाल्के साहब ने ‘राजा हरिश्चंद्र’ जैसी फिल्मों के जरिए भारतीयों को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि किस तरह संसाधनों के अभाव में फाल्के साहब ने अपनी बेटी मंदाकिनी को भी फिल्मों में कास्ट किया और फिल्म निर्माण की बारीकियां सिखाईं।

*बिहार और मुंगेर के विकास पर जोर*
कार्यक्रम के समापन पर हीरो राजन कुमार ने बिहार सरकार और फिल्मकारों से मुंगेर की ओर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुंगेर का किला और यहां की भौगोलिक स्थिति हिंदी सिनेमा की शूटिंग के लिए अत्यंत अनुकूल है।
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