*बंगाल में TMC का किला ढह रहा: जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद का बड़ा दावा, विधायकों ने ममता से तोड़ा नाता*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*बगावत का नया अध्याय*: जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि बंगाल में टीएमसी की बगावत अब केवल सांसदों तक सीमित नहीं रही, बल्कि राज्य विधानसभा के अंदर तक पहुँच गई है।
*विधायकों का बड़ा गुट*: राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, टीएमसी के चुने हुए विधायकों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर बड़ी संख्या में अपना एक अलग समूह बना लिया ५।
*सत्ता के गढ़ में सेंध*: पार्टी के भीतर बढ़ता यह विद्रोह ममता बनर्जी के राजनीतिक प्रभाव को अंदर से खोखला कर रहा है, जिससे टीएमसी का किला टूटता हुआ दिखाई दे रहा है।
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रविंद्र कुमार,संपादक/पटना /कोलकाता/11 जून 2026 :: पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी उथल-पुथल अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने टीएमसी की आंतरिक स्थिति पर बड़ा खुलासा करते हुए कहा है कि ममता बनर्जी के लिए अब अपने घर को बचाना मुश्किल हो गया है।
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राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बगावत की आग अब विधानसभा की दीवारों के भीतर तक पहुँच चुकी है। उनके वक्तव्य के अनुसार, टीएमसी के जो विधायक जनता के बीच से चुनकर आए थे, उन्होंने अब ममता बनर्जी के नेतृत्व पर अविश्वास जताते हुए उनका साथ छोड़ दिया है। बड़ी संख्या में विधायकों द्वारा अलग गुट का गठन करना टीएमसी के संगठनात्मक ढांचे के लिए एक गहरा झटका माना जा रहा है।

राजीव रंजन प्रसाद ने इस घटनाक्रम को ‘अंदरूनी टूट’ करार दिया है। जहाँ पहले सांसद स्तर पर विरोध की खबरें सामने आ रही थीं, अब विधायकों का इस तरह से समूह बनाना यह स्पष्ट करता है कि ममता बनर्जी का नियंत्रण ढीला पड़ रहा है। टीएमसी का यह राजनीतिक किला अंदर से पूरी तरह से टूटता हुआ नज़र आ रहा है।
🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹

जदयू नेता राजीव रंजन प्रसाद का यह वक्तव्य पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी हवा को दर्शाने के लिए पर्याप्त है। यदि टीएमसी के विधायक खुले तौर पर अलग समूह बना रहे हैं, तो यह ममता बनर्जी के लिए केवल राजनीतिक हार नहीं, बल्कि शासन और संगठन पर उनकी पकड़ के खात्मे की शुरुआत है। किसी भी सत्ताधारी दल में विधायकों का इस प्रकार का विद्रोह यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर पार्टी नेताओं का नेतृत्व से मोहभंग हो चुका है। अब ममता बनर्जी को न केवल विपक्ष से जूझना है, बल्कि अपनी पार्टी के बिखराव को रोकने के लिए एक अस्तित्व की लड़ाई लड़नी होगी।
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