*बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर के दावों पर जदयू का तीखा हमला, कहा—”जमानत बचाना भी मुश्किल”*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
👍सीधा हमला: जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन प्रसाद ने प्रशांत किशोर को ‘बड़बोला’ करार देते हुए उन पर तंज कसा।
👍बीते वादों की याद: 2025 विधानसभा चुनाव के दौरान ‘राजनीति से संन्यास’ वाले बयान को लेकर पीके को घेरा।
👍बांकीपुर का रण: जदयू का दावा—बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर एनडीए के लिए कोई चुनौती नहीं हैं।
👍जनता का विश्वास: एनडीए नेताओं का मानना है कि बिहार की जनता अब उनके झांसे में आने वाली नहीं है।

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रविंद्र कुमार,संपादक/ पटना /13 जुलाई 2026 :: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के सरगर्मी के बीच जदयू और प्रशांत किशोर के ‘जन सुराज’ के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जदयू के वरिष्ठ नेता राजीव रंजन प्रसाद ने मीडिया से बात करते हुए प्रशांत किशोर को आड़े हाथों लिया और दावा किया कि बांकीपुर में उनकी सक्रियता एनडीए के लिए कोई मायने नहीं रखती।

👍*2025 के वादे और हकीकत का विश्लेषण*
जदयू नेता ने तल्ख लहजे में कहा कि प्रशांत किशोर का भ्रम बिहार की जनता 2025 के विधानसभा चुनाव में ही तोड़ चुकी है। उन्होंने याद दिलाया कि पीके ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी कि यदि जदयू 25 से अधिक सीटें जीतती है, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे। जदयू ने जीत हासिल की, लेकिन उन्होंने संन्यास लेने के बजाय अब उपचुनाव में किस्मत आजमाने आए हैं। राजीव रंजन प्रसाद के अनुसार, यह उपचुनाव उनके राजनीतिक हताशा को दर्शाता है, जहाँ उनकी जमानत बचने की भी गारंटी नहीं दिख रही है।

🌹*एनडीए के लिए ‘चुनौती’ क्यों नहीं हैं प्रशांत किशोर ?*🌹
जदयू की इस दावेदारी के पीछे एनडीए के नेता मुख्य रूप से तीन तर्क देते हैं:
👍जनता का मोहभंग: एनडीए नेताओं का मानना है कि पीके के बड़बोले दावों की असलियत बिहार की जनता समझ चुकी है। वे अब किसी के ‘झांसे’ में आने वाली नहीं है।
👍संगठनात्मक पकड़: एनडीए का तर्क है कि उनके पास एक मजबूत कैडर बेस और विकास का ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसके आगे पीके का जनसंपर्क अभियान सीमित प्रभाव डाल पाता है।
👍वोट कटवा छवि: पिछले विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की छवि वोट कटवा की बन चुकी है.जदयू के विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर में एनडीए के पास एक स्थिर वोट बैंक है, जिसे प्रशांत किशोर के प्रयोगों से कोई बड़ा खतरा नहीं है।

🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹
बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की चुनावी सक्रियता और उस पर जदयू की तीखी प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि राजनीति में ‘क्रेडिबिलिटी’ (विश्वसनीयता) सबसे बड़ा मुद्दा बन गई है। किसी भी राजनेता के लिए उसके पुराने वादे और वर्तमान आचरण के बीच का अंतर ही उसकी सफलता-विफलता का आधार बनता है। जदयू का यह आक्रामक रुख यह बताने के लिए पर्याप्त है कि एनडीए उपचुनाव को हल्के में नहीं ले रहा है, बल्कि पीके के राजनीतिक प्रयोगों को ‘असंगत’ बताकर उनके जनाधार को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले नतीजे ही तय करेंगे कि बांकीपुर की जनता किसका ‘भ्रम’ तोड़ती है और किसका विश्वास कायम रखती है।
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