*”नक्शा नहीं, आत्मा है बिहार”: बिहार दिवस पर मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन का प्रेरक आह्वान*

विजय सिंह/पटना / 22 मार्च, 2026 :: बिहार दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर सूबे के लघु जल संसाधन मंत्री और ‘हम’ (सेक्युलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए बिहार की अस्मिता और गौरवशाली अतीत को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बिहार केवल एक भौगोलिक सीमा नहीं, बल्कि भारतीय चेतना और संस्कृति की धड़कन है।
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*न्यूज़ हाइलाइट्स (Key Highlights)*
*अस्मिता का प्रतीक: बिहार को केवल एक राज्य नहीं, बल्कि आत्मा और सांस्कृतिक चेतना की ‘जीवंत धरोहर’ बताया।*
*मगध का गौरव: चाणक्य की नीति और चंद्रगुप्त के साहस को आधुनिक सुशासन का आधार स्तंभ करार दिया।*

*वैश्विक केंद्र: नालंदा और विक्रमशिला के जरिए बिहार को ‘ज्ञान की वैश्विक राजधानी’ के रूप में परिभाषित किया।*
*अध्यात्म और शांति: बुद्ध की करुणा और महावीर की अहिंसा को विश्व शांति का एकमात्र मार्ग बताया।*
*भविष्य का संकल्प: विरासत को सहेजते हुए एक सशक्त, समृद्ध और मुस्कुराते हुए बिहार के निर्माण की अपील।*

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*’एक सोच, एक पहचान—बिहार’*
1. *मगध की धरती से सुशासन का संदेश*
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने अपने संबोधन में प्राचीन मगध साम्राज्य का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब दुनिया शासन व्यवस्था को समझ रही थी, तब इसी मिट्टी ने चाणक्य जैसे नीतिशास्त्री और चंद्रगुप्त जैसे साहसी सम्राट दिए। यह भूमि केवल इतिहास नहीं रचती, बल्कि इतिहास को दिशा (Direction) देती है।

2. *ज्ञान और अध्यात्म की वैश्विक राजधानी*
मंत्री महोदय ने नालंदा और विक्रमशिला विश्वविद्यालयों के स्वर्णिम युग को याद करते हुए कहा कि बिहार ने सदियों तक दुनिया को शिक्षित किया है। बुद्ध और महावीर के सिद्धांतों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि शांति और सहिष्णुता बिहार के डीएनए में है, जो आज भी संपूर्ण मानवता को आलोकित कर रही है।

3. *सांस्कृतिक विविधता और मिथिला का योगदान*
सन्देश में मिथिला की कला-संस्कृति और लोक-परंपराओं की जीवंतता पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि बिहार का हर कण संघर्ष और स्वाभिमान की गाथा कहता है। यहाँ की लोकपरंपराएँ केवल रस्में नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पद्धति हैं जो सामाजिक समरसता को बढ़ावा देती हैं।
4. *”हम केवल वारिस नहीं, संवाहक हैं”*
डॉ. सुमन ने प्रदेश के युवाओं और नागरिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि हम केवल पूर्वजों की गौरवशाली विरासत के वारिस (Heirs) नहीं हैं, बल्कि इसे भविष्य की पीढ़ियों तक ले जाने वाले संवाहक (Carriers) भी हैं। उन्होंने हर चेहरे पर मुस्कान और हर घर में उम्मीद लाने का संकल्प दोहराया।
डॉ. संतोष कुमार सुमन का यह संदेश केवल एक औपचारिक बधाई नहीं, बल्कि बिहार के खोए हुए गौरव को पुनः प्राप्त करने का एक ‘रोडमैप’ है। उनका ज़ोर इस बात पर है कि विकास की ऊँचाइयों को छूते हुए हमें अपनी जड़ों—मगध और वैशाली की लोकतांत्रिक चेतना—को कभी नहीं भूलना चाहिए।
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