*नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर पक्ष और विपक्ष ने अपने क्या-क्या तर्क दिये, वह भी जानिए*

रविंद्र कुमार संपादक /पटना /05 मार्च 2026 :: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन पर विपक्षी खेमे से तीखी प्रतिक्रिया आई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा अपने सहयोगियों को ‘खत्म’ करने की राजनीति करती है। उन्होंने जदयू की तुलना शिवसेना और अकाली दल जैसे दलों से करते हुए दावा किया कि अब नीतीश कुमार की पार्टी का अस्तित्व भी खतरे में है।
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*न्यूज़ हाइलाइट्स (News Highlights)*
*सहयोगियों का हश्र: तेजस्वी ने कहा कि भाजपा ने पहले अन्नाद्रमुक, शिवसेना और अकाली दल को कमजोर किया, अब वही काम जदयू के साथ हो रहा है।*
*’हाईजैक’ की राजनीति: 2020 के चुनाव का जिक्र करते हुए तेजस्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा ने तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल कर नीतीश कुमार को ‘हाईजैक’ कर लिया था।*
*रबड़ स्टांप की तलाश: तेजस्वी के अनुसार, भाजपा बिहार में एक ‘रबड़ स्टांप’ मुख्यमंत्री चाहती है, न कि ऐसा नेता जो पिछड़ों और दलितों की बात करे।*
*सहानुभूति और विदाई: तेजस्वी ने नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति जताई और बिहार की सेवा के लिए उनका धन्यवाद भी किया।*
*जन भावनाओं के खिलाफ: सत्ता में हो रहे इस बदलाव को तेजस्वी ने जनता के जनादेश और भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताया।*
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बिहार की सियासत में ‘नीतीश युग’ के एक अध्याय के समापन की चर्चाओं के बीच तेजस्वी यादव ने भाजपा के ‘चाल और चरित्र’ पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा किया है। पत्रकारों से बात करते हुए तेजस्वी ने कहा कि भाजपा का इतिहास रहा है कि वह जिसके साथ भी रही, उसे बर्बाद करने का काम किया।

तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा, “एनडीए ने 2025 से 2030 तक नीतीश कुमार के नेतृत्व का नारा दिया था, लेकिन यह सब महज एक दिखावा था। हमने पहले ही कहा था कि भाजपा उन्हें छह महीने से ज्यादा कुर्सी पर नहीं रहने देगी। आज वही सच साबित हो रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा मूल रूप से ओबीसी, दलित और आदिवासी विरोधी है। वे नहीं चाहते कि बिहार में कोई सशक्त पिछड़ा नेता टिके, इसलिए वे अब अपनी पसंद का ‘रबड़ स्टांप’ मुख्यमंत्री बैठाना चाहते हैं। हालांकि, अपने हमले के बीच तेजस्वी ने एक नरम रुख भी दिखाया। उन्होंने कहा कि भले ही नीतीश जी हमें छोड़कर गए हों, लेकिन बिहार के विकास में उनके योगदान के लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं और आज उनकी इस राजनीतिक विदाई पर हमें उनके प्रति सहानुभूति है।

*नीतीश का राज्यसभा गमन: सत्ता बनाम विपक्ष (तुलनात्मक विश्लेषण)*
*तुलना का आधार* == *सत्ता पक्ष (अमित शाह / NDA का रुख)* == *विपक्ष (तेजस्वी यादव / RJD का रुख)*
1.*शासनकाल का आकलन* *नीतीश कुमार का कार्यकाल बिहार के इतिहास का ‘स्वर्णिम अध्याय’ है।*
*यह जन भावनाओं के खिलाफ है; 2025 तक के वादे को बीच में ही तोड़ दिया गया।*
2.*भाजपा के साथ गठबंधन अटूट रिश्ता* *भाजपा नीतीश जी के अनुभव का राष्ट्रीय स्तर पर उपयोग करना चाहती है।*
*भाजपा ने नीतीश को ‘हाईजैक’ कर लिया है; वे सहयोगियों (JDU) को खत्म कर रहे हैं।*
3.*जंगलराज बनाम विकास* *नीतीश ने बिहार को ‘जंगलराज’ से बाहर निकाला और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया।*
*भाजपा को ‘रबड़ स्टांप’ मुख्यमंत्री चाहिए, इसलिए एक सशक्त पिछड़े नेता को हटाया जा रहा है।*
4.*भ्रष्टाचार और छवि* *उनका जीवन पूरी तरह भ्रष्टाचार मुक्त और बेदाग रहा है, जो एक मिसाल है।*
*भाजपा OBC, दलित और आदिवासी विरोधी है; वह पिछड़ों की आवाज दबाना चाहती है।*
5.*भविष्य की भूमिका* *राष्ट्रीय राजनीति में उनका प्रवेश देश के लिए गौरव की बात है।*
*हमारी सहानुभूति उनके साथ है; उन्हें राजनीति से ‘साइडलाइन’ किया जा रहा है।*

*विश्लेषण: एक ही सिक्के के दो पहलू*
जहाँ *अमित शाह* के बयानों में नीतीश कुमार के प्रति ‘कृतज्ञता’ और उनके कद को ‘राष्ट्रीय स्तर’ पर ले जाने की रणनीति दिखती है, वहीं तेजस्वी यादव के बयानों में ‘आशंका’ और भाजपा की ‘विस्तारवादी नीति’ पर हमला झलकता है।

वही *तेजस्वी यादव* का दांव यह है कि वे खुद को पिछड़ों के एकमात्र मसीहा के रूप में पेश करें, जबकि अमित शाह यह संदेश दे रहे हैं कि एनडीए अपने कद्दावर नेताओं का सम्मान करना जानती है।

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