*ज्ञान और शौर्य की धरती पावापुरी (नालंदा) से विकसित बिहार का शंखनाद*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*’नालंदा में ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’*: IPS विकास वैभव ने युवाओं में भरा जोश, कहा- “जरासंध के शौर्य वाली इस धरती में है बिहार बदलने की शक्ति।”
*अतीत से प्रेरणा, भविष्य का संकल्प*: मगध की सेना से कांपा था विश्व विजेता सिकंदर, वही उद्यमिता और साहस आज फिर जरूरी।
*मिशन 2047*: जाति और संप्रदाय के ‘लघुवाद’ से ऊपर उठकर ही बनेगा विकसित बिहार।
*शिक्षा से उद्यमिता तक*: पलायन रोकने के लिए बिहार में ही रोजगार सृजन और कौशल विकास को बताया अनिवार्य।
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*’लेट्स इंस्पायर बिहार’ के माध्यम से सामाजिक पुनर्जागरण की अपील*
रविंद्र कुमार,संपादक /पावापुरी (नालंदा)/06 मई 2026 ::
बिहार के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक केंद्र पावापुरी में आयोजित ‘प्रतिभा सम्मान समारोह’ के दौरान IPS विकास वैभव ने एक बार फिर बिहार के गौरवशाली अतीत को आधुनिक विकास की नींव बनाने का आह्वान किया। ‘लेट्स इंस्पायर बिहार’ अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने नालंदा के शाब्दिक अर्थ ‘जहाँ दान का अंत न हो’ (ना+अलं+दा) की व्याख्या करते हुए ज्ञान की प्राचीन परंपरा को नमन किया।

*शौर्य का स्मरण: मगध की सैन्य शक्ति और श्रीकृष्ण की रणनीति*
अपने संबोधन में विकास वैभव ने मगध के उस पराक्रम को रेखांकित किया जिसका लोहा यूनानी इतिहासकार मेगास्थनीज ने भी माना था। उन्होंने बताया कि जिस मगध के पास 6 लाख पैदल सैनिक और हजारों रण-प्रशिक्षित हाथी थे, उसकी धूल से सूर्य तक आच्छादित हो जाता था। इसी शौर्य के डर से सिकंदर की सेना को कदम पीछे खींचने पड़े थे। उन्होंने महाभारत काल का प्रसंग साझा करते हुए बताया कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण को जरासंध के प्रभाव के कारण अपनी रणनीति बदलनी पड़ी थी और राजगृह में प्रवेश के लिए दुर्गम रास्तों का चुनाव करना पड़ा था।

*विकसित बिहार का रोडमैप: 2047 का लक्ष्य*
वर्तमान चुनौतियों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि यदि हमारे पूर्वजों ने बिना किसी आधुनिक तकनीक और सूचना तंत्र के अखंड भारत और महान विश्वविद्यालयों की स्थापना की थी, तो आज हम क्यों पिछड़ रहे हैं? उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्या क्षमता की नहीं, बल्कि ‘नैसर्गिक ऊर्जा के सही दिशा में प्रयोग’ की है। उनका संकल्प है कि 2047 तक बिहार को इस स्थिति में लाया जाए कि शिक्षा, स्वास्थ्य या रोजगार के लिए किसी भी बिहारी को पलायन न करना पड़े।

*लघुवाद का त्याग और उद्यमिता की क्रांति*
विकास वैभव ने युवाओं से अपील की कि वे जाति, संप्रदाय और लिंगभेद जैसे ‘लघुवाद’ (संकीर्ण विचारधारा) से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में सोचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि बिहार में केवल डिग्रियां बांटने से बदलाव नहीं आएगा, बल्कि शिक्षा, समता और उद्यमिता का त्रिकोण बनाना होगा। जब तक उद्यमिता की क्रांति नहीं आएगी, तब तक रोजगार का सृजन संभव नहीं है।

*संपादकीय विश्लेषण: अतीत का ‘स्वत्व-बोध’ और भविष्य की चुनौतियां*
IPS विकास वैभव का यह संबोधन केवल एक प्रशासनिक अधिकारी का भाषण नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक और बौद्धिक आंदोलन की रूपरेखा है। उनके विश्लेषण के तीन मुख्य बिंदु उभर कर आते हैं:

*ऐतिहासिक मनोविज्ञान*: वे बिहार के युवाओं में व्याप्त हीनभावना को ‘मगध के शौर्य’ और ‘नालंदा के ज्ञान’ से प्रतिस्थापित करना चाहते हैं। उनका मानना है कि जब तक समाज को अपने ‘स्वत्व’ (Self-identity) का बोध नहीं होगा, वह भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता।

*सामाजिक एकीकरण बनाम लघुवाद*: बिहार की राजनीति और समाज अक्सर जातिगत समीकरणों में उलझा रहता है। विकास वैभव का ‘शिक्षा और समता’ का संदेश इसी संकीर्णता पर चोट करता है, जो विकास के लिए अनिवार्य शर्त है।

*आर्थिक आत्मनिर्भरता*: उन्होंने बहुत ही सटीक ढंग से रेखांकित किया है कि ‘पलायन’ बिहार का सबसे बड़ा घाव है। इसका समाधान केवल सरकारी नौकरियों में नहीं, बल्कि ‘उद्यमिता’ (Entrepreneurship) की उस संस्कृति को पुनर्जीवित करने में है, जिसने कभी मगध को आर्थिक महाशक्ति बनाया था।
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