April 29, 2026

*वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार सिन्हा की पुस्तक ‘कायस्थ विरासत’ का पटना में भव्य विमोचन; सांस्कृतिक गौरव और शोध का अनूठा दस्तावेज*

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*​आयोजन*: पटना के पुनाईचक में आयोजित समारोह में वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार सिन्हा की दूसरी पुस्तक “कायस्थ विरासत – चित्रगुप्त से चार धाम तक” का अनावरण।

*​मुख्य अतिथि*: मुकेश कुमार सिन्हा, नीलकमल, दीपक कुमार अभिषेक और संजय कुमार सिन्हा ने संयुक्त रूप से😭6 विमोचन।

*​विषय-वस्तु*: पुस्तक कायस्थ समाज की उत्पत्ति, भगवान चित्रगुप्त के पौराणिक महत्व और उनके प्रमुख धार्मिक स्थलों पर केंद्रित एक शोधपरक कृति है।

*​लेखक का पोर्टफोलियो*: लेखक की 3e4 कृति “शिव तत्व” के बाद यह दूसरी बड़ी सफलता; आगामी पुस्तकों में “गुप्त महाशक्ति” और राजनीतिक विषयों पर कार्य जारी।

*​उद्देश्य*: युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना।

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​पटना, 29 अप्रैल, 2026 :: राजधानी के पुनाईचक स्थित एक गरिमामय समारोह में आज वरिष्ठ पत्रकार और लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा की नवीनतम पुस्तक “कायस्थ विरासत – चित्रगुप्त से चार धाम तक” का भव्य विमोचन संपन्न हुआ। इस अवसर पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग, साहित्यकारों और पत्रकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर इस साहित्यिक कृति को समाज के लिए एक मील का पत्थर बताया।

​पुस्तक का विमोचन मुख्य रूप से मुकेश कुमार सिन्हा (मुकेश महान), नीलकमल, दीपक कुमार अभिषेक और संजय कुमार सिन्हा के कर-कमलों द्वारा किया गया। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान समय में जब सूचनाओं की बाढ़ है, तब प्रामाणिक और शोधपरक सांस्कृतिक लेखन की महत्ता और बढ़ जाती है।

*​सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रासंगिकता*

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यह पुस्तक केवल धार्मिक आस्था का वर्णन नहीं करती, बल्कि कायस्थ समाज के सामाजिक ढांचे और उनके इष्टदेव भगवान चित्रगुप्त के ऐतिहासिक व पौराणिक संदर्भों का गहन विश्लेषण करती है। इसमें चित्रगुप्त जी के प्रमुख धामों के विस्तृत वर्णन के साथ-साथ समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से कायस्थ समाज के विकास यात्रा को रेखांकित किया गया है।

*​लेखक का विजन*

समारोह को संबोधित करते हुए लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा ने अपनी लेखन यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी पहली पुस्तक “शिव तत्व” को मिली सराहना ने उन्हें इस जटिल विषय पर शोध करने की प्रेरणा दी। उन्होंने यह भी साझा किया कि उनकी आगामी कृति “गुप्त महाशक्ति” शीघ्र ही पाठकों के बीच होगी, साथ ही वे बच्चों के साहित्य और राजनीति पर भी नई पुस्तकें तैयार कर रहे हैं।

 

*​विद्वानों की राय*

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों ने पुस्तक की सराहना करते हुए इसे ‘संग्रहणीय’ बताया। IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहन कुमार, बाबा धानु पाठक और नरेन्द्र कुमार सिन्हा ने पुस्तक को ज्ञान का वह कोश बताया जिससे वर्तमान पीढ़ी अब तक अनभिज्ञ थी।

 

*​संपादकीय विश्लेषण: परंपरा और आधुनिकता का सेतु*

​जितेन्द्र कुमार सिन्हा की कृति “कायस्थ विरासत” का विमोचन केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक विशेष सांस्कृतिक पहचान के दस्तावेजीकरण का प्रयास है।

*​अस्मिता की पहचान*: वैश्वीकरण के दौर में जहाँ समाज अपनी मूल जड़ों से कट रहा है, ऐसी पुस्तकें ‘सांस्कृतिक एंकर’ का कार्य करती हैं। यह पुस्तक कायस्थ समाज को उसकी बौद्धिक और धार्मिक विरासत का अहसास कराती है।

*​शोधपरक दृष्टिकोण*: पत्रकारिता की पृष्ठभूमि होने के कारण लेखक ने केवल किंवदंतियों पर भरोसा न कर तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी है, जो इसे सामान्य धार्मिक पुस्तकों से अलग श्रेणी में खड़ा करता है।

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*​भविष्य की दिशा*: लेखक द्वारा भविष्य में बच्चों के लिए और राजनीतिक विषयों पर लेखन की घोषणा यह दर्शाती है कि वे समाज के हर आयु वर्ग और हर पहलू को अपनी लेखनी से जोड़ना चाहते हैं। यह साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना जागृत करने का एक सराहनीय उपक्रम है।

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