May 28, 2026

*सुप्रीम कोर्ट का सख्त तेवर ,शिक्षा मंत्रालय को थमाया नोटिस*

रविंद्र कुमार,संपादक/​नई दिल्ली /27 फरवरी 2026 :: सर्वोच्च न्यायालय ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका की छवि धूमिल करने वाले संदर्भों के प्रकाशन पर कड़ा रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश *न्यायमूर्ति सूर्यकांत* ने इस कृत्य को न्यायपालिका को कलंकित करने का एक ‘सुनियोजित षड्यंत्र’ करार देते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा। अदालत ने इस गंभीर चूक के लिए शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT के निदेशक को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर जवाब तलब किया है।

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*​न्यूज़ हाइलाइट्स (News Highlights)*

*​सीजेआई की सख्त टिप्पणी*: “बेहद कैलकुलेटेड तरीके से न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास हुआ है।”

*​सख्त कार्रवाई के संकेत*: दोषियों के खिलाफ ‘अवमानना’ और ‘क्रिमिनल मिसकंडक्ट’ के तहत कार्रवाई की चेतावनी।

*​नोटिस जारी*: स्कूल शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय के सचिव और NCERT निदेशक को व्यक्तिगत रूप से जवाब देने का आदेश।

*​जांच का दायरा*: अदालत पता लगाएगी कि पाठ्यपुस्तक में इस विवादित अंश को शामिल करने के पीछे कौन जिम्मेदार है।

*​प्राथमिकता*: कोर्ट ने माना कि यह प्रकाशन पहली नजर में न्यायपालिका को जानबूझकर बदनाम करने का प्रयास है।

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​**शिक्षा के नाम पर ‘कलंकित’ करने का प्रयास बर्दाश्त नहीं**

*​”मामला यहाँ खत्म नहीं होता” – मुख्य न्यायाधीश*

गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि न्यायपालिका की गरिमा के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त के बाहर है। उन्होंने कहा, “यह महज एक प्रिंटिंग एरर नहीं है, बल्कि चीजों को बहुत ही सोच-समझकर (Calculated way) पेश किया गया है। मैं इसके पीछे के जिम्मेदार लोगों का पता लगाकर रहूंगा।” कोर्ट ने साफ किया कि यह मामला सिर्फ एक किताब तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्यायपालिका की नींव पर चोट है।

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*​NCERT और शिक्षा मंत्रालय के खिलाफ ‘कंटेप्ट’ का खतरा*

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि आखिर क्यों न संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध ‘कंटेप्ट ऑफ कोर्ट’ और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई शुरू की जाए? कोर्ट का मानना है कि यदि यह सिद्ध हो जाता है कि यह प्रकाशन न्यायपालिका को जनता की नजरों में गिराने के उद्देश्य से किया गया था, तो यह ‘आपराधिक अवमानना’ (Criminal Contempt) के दायरे में आएगा।

*​शिक्षा नीति और पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा पर सवाल*

इस विवाद ने NCERT की पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अदालत ने यह जानने में रुचि दिखाई है कि क्या इस तरह के संवेदनशील विषयों को शामिल करने से पहले किसी कानूनी विशेषज्ञ या न्यायपालिका के प्रतिनिधि से परामर्श लिया गया था।

*​अगला कदम*

अदालत ने शिक्षा मंत्रालय और NCERT से विस्तृत हलफनामा मांगा है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार और परिषद इस ‘गंभीर चूक’ के पीछे क्या तर्क देते हैं और इसके लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है।

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रविन्द्र कुमार
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