*’नीतीश मॉडल’ पर ‘गुजरात मॉडल’ भारी: राजद का बड़ा प्रहार—”बिहार में वजूद खो चुकी है जेडीयू”*

रविंद्र कुमार, संपादक/पटना/ 02 मई, 2026 :: बिहार की राजनीति में मचे घमासान के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य की एनडीए सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। शनिवार को राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का ‘सुशासन मॉडल’ अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है और भाजपा ने ‘गुजरात मॉडल’ के जरिए राज्य की कमान अपने हाथों में ले ली है।

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*अपमान का आरोप*: कानून व्यवस्था की बैठक में दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को न बुलाना उनके पद की गरिमा को ‘रद्दी’ समझने जैसा।
*गुजरात बनाम नीतीश मॉडल*: सम्राट चौधरी का संदेश साफ है—सरकार मोदी मॉडल (गुजरात) से चलेगी, क्योंकि नीतीश मॉडल ने सिर्फ भ्रष्टाचार और अपराध दिया।
*4-C का फार्मूला*: राजद ने सरकार को ‘चेयर, क्राइम, करप्शन और कम्युनलिज्म’ से समझौता करने वाली सरकार बताया।
*वित्तीय बदहाली*: बिहार का हर नवजात 27,000 रुपये का कर्जदार; सरकार से ‘श्वेत पत्र’ जारी करने की मांग।
जेडीयू का अंत: शक्ति यादव का दावा—विचारों के आधार पर जेडीयू खत्म हो चुकी है, अब सीधी लड़ाई भाजपा और राजद के बीच है।
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पटना: बिहार प्रदेश राजद कार्यालय के कर्पूरी सभागार में आयोजित एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने राज्य सरकार के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक किया। उनके साथ प्रवक्ता एजाज अहमद, अरुण कुमार यादव और अन्य नेता भी उपस्थित थे।
*उप-मुख्यमंत्रियों की ‘उपेक्षा’ पर तंज*

शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि हाल ही में हुई कानून-व्यवस्था की समीक्षा बैठक में दोनों उप-मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित न करना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार की नजर में उनकी हैसियत ‘कूड़ेदान की रद्दी’ जैसी है। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी अब स्पष्ट रूप से भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के दिशा-निर्देशों पर सरकार चला रहे हैं, जिससे जेडीयू के भीतर छटपटाहट बढ़ गई है।
*भ्रष्टाचार और कर्ज का जाल*

आर्थिक मोर्चे पर घेरते हुए राजद ने कहा कि बिहार के खजाने से 41,000 करोड़ रुपये खर्च करने वाली सरकार यह बताए कि खजाना कितना खाली है? राजद के अनुसार, सरकार की गलत नीतियों के कारण बिहार का हर नागरिक जन्म से ही कर्ज के बोझ तले दबा है। उन्होंने तंज कसा कि जो सरकार ‘3-C’ (Crime, Corruption, Communalism) से न समझौता करने का दावा करती थी, वह आज इन्हीं के सहारे सत्ता में टिकी है।

*सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और अपराध*
राजद प्रवक्ता ने गंभीर आरोप लगाया कि बिहार में ‘मॉब लिंचिंग’ और जातीय विभेद को सरकारी स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने एनसीआरबी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि खुद सम्राट चौधरी ने स्वीकार किया है कि पिछले 20 वर्षों में नीतीश शासन के दौरान करीब 70 हजार हत्याएं हुई हैं।

*संपादकीय विश्लेषण: ‘अस्तित्व की लड़ाई में उलझा एनडीए’*
राजद का यह हमला केवल एक विपक्षी दल की बयानबाजी नहीं है, बल्कि यह बिहार एनडीए के भीतर बढ़ते ‘पावर स्ट्रगल’ को रेखांकित करता है।
*भाजपा का बढ़ता कद*: सम्राट चौधरी द्वारा ‘गुजरात मॉडल’ की बात करना यह संकेत देता है कि भाजपा अब नीतीश कुमार के ‘जूनियर पार्टनर’ की भूमिका से बाहर निकलकर ‘बिग ब्रदर’ की भूमिका में आ गई है।
*वोट बैंक की राजनीति*: राजद द्वारा अल्पसंख्यकों और वक्फ संशोधन जैसे मुद्दों को उठाना यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि भाजपा-जेडीयू के साथ आने से जो मुस्लिम-यादव (M-Y) समीकरण प्रभावित हुआ है, उसे फिर से एकजुट किया जा सके।
*ध्रुवीकरण बनाम विकास*: जहाँ सरकार अपराध मुक्त बिहार का श्रेय लेना चाहती है, वहीं विपक्ष इसे जातीय विद्वेष और सांप्रदायिक तनाव से जोड़कर सरकार की घेराबंदी कर रहा है। आने वाले समय में यह ‘मॉडल’ की जंग बिहार चुनाव की दिशा तय करेगी।
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