August 12, 2026

*₹144 करोड़ से ₹2,844 करोड़ पहुंचा बिहार का कृषि निर्यात:जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने बताया नीतीश कुमार के विजन का परिणाम*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

​👍​कृषि निर्यात में अभूतपूर्व उछाल: बिहार का कृषि निर्यात 2023 में ₹144 करोड़ ($17.6M) से बढ़कर 2024-25 में ₹2,844 करोड़ ($340.6M) पहुंचा।

👍​₹2,700 करोड़ की रिकॉर्ड वृद्धि: राष्ट्रीय स्तर पर कृषि निर्यात स्थिर रहने के बावजूद बिहार ने एक वर्ष में ₹2,700 करोड़ का इजाफा दर्ज किया।

👍​वैश्विक बाजार में बिहार के उत्पाद: देश के 85% मखाने और 71% शाही लीची के साथ जर्दालु आम, कतरनी चावल और मक्का की अंतरराष्ट्रीय मांग बढ़ी।

👍​’कृषि रोड मैप’ की सफलता: जदयू का दावा— पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू कृषि रोड मैप ने पारंपरिक खेती को प्रसंस्करण और वैश्विक बाजार से जोड़ा।

🌹===========================🌹            रविन्द्र कुमार, संपादक /पटना/11 अगस्त 2026 :: जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा है कि बिहार में कृषि निर्यात के क्षेत्र में आई हालिया अभूतपूर्व प्रगति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा तैयार किए गए ‘कृषि रोड मैप’ की दूरदर्शी नीतियों का परिणाम है। इस रोड मैप ने राज्य की कृषि को केवल फसल उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण (प्रॉससिंंग) और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की मजबूत नींव रखी है।

​👍*आंकड़ों में निर्यात की छलांग*

डब्ल्यूटीओ (WTO) और एपीडा (APEDA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए जदयू प्रवक्ता ने बताया कि बीते दो वर्षों से जहां देश का कुल कृषि निर्यात लगभग ₹2.22 लाख करोड़ के स्तर पर स्थिर है, वहीं बिहार ने इसमें ऐतिहासिक छलांग लगाई है।

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​वर्ष 2023 में बिहार से कृषि निर्यात करीब 17.6 मिलियन डॉलर (लगभग ₹144 करोड़) था।

​वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा बढ़कर 340.6 मिलियन डॉलर (लगभग ₹2,844 करोड़) पर पहुंच गया।

अर्थात मात्र एक वर्ष की अवधि में बिहार के कृषि निर्यात में करीब ₹2,700 करोड़ की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

👍*​वैश्विक मंच पर स्थानीय कृषि उत्पाद*

राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बिहार वर्तमान में देश की कुल शाही लीची का लगभग 71 प्रतिशत और मखाने का 85 प्रतिशत उत्पादन करता है। इसके अतिरिक्त जर्दालु आम, कतरनी चावल, मक्का, सब्जी, फल, मशरूम और मधुमक्खी पालन जैसे क्षेत्रों में किसानों को व्यापक अवसर मिले हैं। ये विशिष्ट उत्पाद अब देश की सीमाओं से बाहर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मजबूत पहचान बना रहे हैं।

👍*​आजीविका और रोजगार का नया जरिया*

उन्होंने कहा कि ‘कृषि रोड मैप’ का मूल उद्देश्य उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देना रहा है। खेत से वैश्विक बाजार तक बिहार के उत्पादों की पहुंच यह सिद्ध करती है कि सही नीति, इंफ्रास्ट्रक्चर और सरकारी सहयोग मिले तो कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​बिहार जैसे कृषि-प्रधान राज्य के लिए कृषि निर्यात का ₹144 करोड़ से बढ़कर ₹2,844 करोड़ तक पहुंचना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप का सकारात्मक संकेत है। मखाना, शाही लीची और कतरनी चावल जैसे विशिष्ट (जीआई टैग प्राप्त) उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलना राज्य की कृषि क्षमता को रेखांकित करता है। हालांकि, इस वृद्धि दर को दीर्घकालिक रूप से बनाए रखने के लिए केवल नीतिगत घोषणाएं पर्याप्त नहीं होंगी। कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी और गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी चेकिंग) की व्यवस्था को जमीनी स्तर पर और मजबूत करना होगा, ताकि निर्यात की इस बढ़ी हुई कीमत का सीधा और वास्तविक आर्थिक लाभ बिचौलियों के बजाय राज्य के छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंच सके।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
मो .9304238302

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