August 12, 2026

*झुन्नू श्रीवास्तव द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सफल मंचन : ‘विदेशिया’ शैली में जीवंत हुए भारतीय संस्कृति के मूल्य*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स

👍​पटना के प्रेमचंद रंगशाला में रविवार संध्या झुन्नू श्रीवास्तव द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सफल मंचन संपन्न हुआ।

👍​प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्वी, अशोक प्रियदर्शी एवं आकाशवाणी के पूर्व केंद्र निदेशक डॉ. किशोर सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

👍​बिहार की सुप्रसिद्ध लोक-नाट्य ‘विदेशिया’ शैली पर आधारित इस नाटक ने भारतीय संस्कृति, ‘अतिथि देवो भव:’ और सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

👍​संजय किशोर (किशन), दिग्गज कलाकार डॉ. ओम प्रकाश (विदूषक) और नितीश (सूत्रधार) के जीवंत अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

👍​मंच परे मोहम्मद जानी (संगीत), मनोज मयंक (रूप-सज्जा) और राज कपूर (प्रकाश व्यवस्था) का तकनीकी योगदान सराहनीय रहा।

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​रविंद्र कुमार,संपादक/​पटना /11 अगस्त 2026 ::​ राजधानी स्थित प्रसिद्ध सांस्कृतिक केंद्र ‘प्रेमचंद रंगशाला’ में रविवार की संध्या रंगदर्शकों के लिए बेहद खास रही। वरिष्ठ रंगकर्मी झुन्नू श्रीवास्तव द्वारा लिखित एवं निर्देशित हास्य-व्यंग्य नाटक ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का सफल मंचन किया गया। भारतीय संस्कृति, सामाजिक ताने-बाने और आत्मीयता के मूल्यों से ओत-प्रोत इस नाटक ने दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ एक गंभीर सामाजिक संदेश भी दिया।

​कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ पटना के प्रख्यात चिकित्सक डॉ. दिवाकर तेजस्वी, अशोक प्रियदर्शी और आकाशवाणी के सेवानिवृत्त केंद्र निदेशक डॉ. किशोर सिन्हा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। अतिथियों ने बिहार की समृद्ध नाट्य परंपरा और इस प्रकार के अर्थपूर्ण सांस्कृतिक आयोजनों की सराहना की।

​बिहार की पारंपरिक ‘विदेशिया’ शैली पर पिरोए गए इस नाटक में अत्यंत सहजता के साथ ‘अतिथि देवो भव:’ तथा पूरे विश्व को एक परिवार मानने वाली ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को धरातल पर उतारा गया। नाटक के कथाक्रम में हास्य और व्यंग्य का ऐसा संतुलन था जिसने दर्शक दीर्घा को तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने पर मजबूर कर दिया।

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​अभिनय के मोर्चे पर ‘किशन’ के रूप में संजय किशोर और ‘सूत्रधार’ के रूप में नितीश ने शानदार प्रभाव छोड़ा। वहीं ‘विदूषक’ की भूमिका में दिग्गज रंगकर्मी डॉ. ओम प्रकाश के सटीक कॉमिक टाइमिंग और संवाद अदायगी ने पूरे नाटक में जान फूंक दी। तीनों मुख्य किरदारों की जुगलबंदी ने दर्शकों को अंत तक थियेटर से जोड़े रखा।

​नाट्य प्रस्तुति की सफलता में बैकस्टेज टीम की भूमिका भी बेहद अहम रही। मोहम्मद जानी का कर्णप्रिय संगीत, मनोज मयंक का सटीक मेकअप (रूप-सज्जा) और राज कपूर की बेहतरीन लाइट डिज़ाइनिंग (प्रकाश व्यवस्था) ने मंच के माहौल को और अधिक प्रभावकारी बना दिया।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

आज के डिजिटल और भागदौड़ भरे दौर में जहां पारंपरिक मूल्य पीछे छूटते दिख रहे हैं, वहां ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे नाटकों का मंचन अत्यंत प्रासंगिक है। बिहार की समृद्ध लोक शैली ‘विदेशिया’ का उपयोग कर भारतीय संस्कृति के मूल मंत्रों को हास्य-व्यंग्य के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाना रंगमंच की एक बड़ी उपलब्धि है। ऐसे सार्थक प्रयास न केवल क्षेत्रीय लोक-कलाओं को जीवंत रखते हैं, बल्कि समाज को जड़ों से जोड़े रखने का सशक्त माध्यम भी बनते हैं.

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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