*भंगिमा वार्षिकोत्सव – 2025 ! मैथिली नाटक “बड़का साहेब” का मंचन*

जितेन्द्र कुमार सिन्हा /पटना, 10 अगस्त 2025 :: मैथिली रंगमंच की अग्रणी संस्था भंगिमा, जो 41 वर्षों से निरंतर सांस्कृतिक और नाट्य गतिविधियों में सक्रिय है, अपने वार्षिकोत्सव 2025 के अवसर पर सामाजिक चेतना पर आधारित मैथिली नाटक “बड़का साहेब” का मंचन विद्यापति भवन, पटना में किया है।

भंगिमा की स्थापना 4 अगस्त 1984 को पटना में हुई थी, जिसका उद्देश्य मिथिलांचल की समृद्ध इतिहास, संस्कृति, परंपरा और साहित्य के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ मैथिली रंगमंच को लोकप्रिय बनाना और उसका सतत विकास करना है। संस्था राज्य, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रंगमंचीय गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेती रही है और बिहार के पारंपरिक रंगमंचीय स्वरूपों के अध्ययन, विश्लेषण, अभ्यास एवं प्रयोग के माध्यम से नए प्रयोगों को प्रोत्साहित करती है।

“बड़का साहेब” एक सशक्त सामाजिक परिवर्तन और चेतना पर आधारित है जो दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर मजबूर किया है। नाटक में समाज की वास्तविकताओं को हास्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है, जिससे सभी दर्शकों के लिए रोचक और सार्थक बन गया।

भंगिमा अब तक 200 से अधिक मौलिक एवं अनूदित नाटकों का मंचन कर चुकी है, जिनमें लोकनाट्य, कीर्तनीय नाटक, बाल नाटक और चैम्बर ड्रामा भी शामिल हैं। संस्था एक अर्धवार्षिक रंगमंचीय पत्रिका “भंगिमा” का प्रकाशन भी करती है। श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर द्वारा लिखित “बड़का साहेब” नाटक का निर्देशन रश्मि मिश्रा ने किया तथा कलाकार के रूप में निखिल रंजन, कुमार सुमित, नवी ठाकुर, अमलेश आनंद, आशा चौधरी, विनोद कुमार मिश्रा, रवींद्र विहारी राजू, आल्या झा, कुंदन झा और सहयोग में अमित मिश्र, अवधेश झा, आशुतोष कुमार “आचार्य”, दिनेश झा, खुशबू मिश्र आदि थे।

नाटक इस तरह से प्रारंभ होता है कि गांव से चूड़ा मणि झा अपने मामा के साथ शहर में गांव के चाचा बालचंद झा के यहां नौकरी के सिलसिला में जाते हैं। वहां उनका प्रथम संवाद नौकर भोला से होता है, फिर चाची और चाचा से… चाची गांव की परंपरा और संस्कार को वहां निर्वहन कर रही थी और चाचा बदल गए थे, शहर के बड़का साहेब के रूप में….

भंगिमा रत्न सम्मान लेखक, कथाकार एवं निर्देशक श्री कुणाल जी को दिया गया तथा भंगिमा भूषण – 2025 श्रीमती कलाकार ज्योति प्रभा को दिया गया।
संस्था के अध्यक्ष ने बताया कि — “हमारा प्रयास है कि मैथिली रंगमंच को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए और इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती से स्थापित किया जाए। ‘बड़का साहेब’ इसी दिशा में एक सार्थक कदम है।”
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