May 2, 2026

*’हार के डर से चुनाव आयोग पर हमलावर है TMC’: जेडीयू नेता राजीव रंजन प्रसाद का ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार*

रविंद्र कुमार,संपादक /​पटना/कोलकाता/02 मई 2026 ::: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट से बौखलाकर TMC अब संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है।

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

*​बिदाई का संकेत*: जेडीयू नेता का दावा—ममता बनर्जी को अपनी हार का अहसास हो चुका है।

*​मतदाताओं का रुख*: शुरुआती दोनों चरणों में बंगाल की जनता ने TMC को नकार दिया है।

*​संस्थाओं पर हमला*: हार के डर से निर्वाचन तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है TMC।

*​EC का रुख*: चुनाव आयोग ने TMC के सभी आरोपों का तार्किक जवाब दे दिया है।

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​पटना: जेडीयू के कद्दावर नेता राजीव रंजन प्रसाद ने पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार पर तीखा हमला बोला है। पटना में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने शुरुआती चरणों के मतदान में ही यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अब बदलाव चाहते हैं।

​राजीव रंजन ने आरोप लगाया कि TMC एक सोची-समझी रणनीति के तहत निर्वाचन आयोग और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “ममता बनर्जी को इस बात का स्पष्ट अंदाजा हो गया है कि पश्चिम बंगाल से उनकी बिदाई तय है। जब भी इन लोगों को अपनी हार सामने दिखाई देती है, ये निर्वाचन तंत्र पर ठीकरा फोड़ना शुरू कर देते हैं।”

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​प्रसाद ने आगे कहा कि निर्वाचन आयोग ने TMC के प्रत्येक आरोप का विस्तृत और तथ्यात्मक जवाब दिया है, जिससे यह साफ होता है कि आरोप बेबुनियाद हैं। उनके अनुसार, मतदाताओं ने दोनों चरणों में TMC को करारी शिकस्त दी है और यही बौखलाहट अब बयानों में झलक रही है।

*​संपादकीय विश्लेषण: ‘आरोप बनाम जनादेश’*

​राजीव रंजन प्रसाद का यह बयान एनडीए की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ममता बनर्जी को ‘लोकतंत्र विरोधी’ और ‘हार से डरी हुई’ नेता के रूप में पेश किया जा रहा है। इस बयान के पीछे के मुख्य पहलू निम्नलिखित हैं:

*​मनोवैज्ञानिक दबाव*: विपक्षी नेताओं द्वारा ‘बिदाई’ जैसे शब्दों का प्रयोग मतदाताओं के बीच एक ‘लहर’ (Wave) बनाने की कोशिश है, ताकि न्यूट्रल वोटर्स को प्रभावित किया जा सके।

*​संस्थागत साख की रक्षा*: चुनाव आयोग पर हमलों को “सुनियोजित साजिश” बताना, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को जनता की नजरों में बनाए रखने का एक प्रयास है।

*​ध्रुवीकरण की राजनीति*: जेडीयू और एनडीए के अन्य घटक दल यह संदेश देना चाहते हैं कि TMC का प्रशासन अब जनता का विश्वास खो चुका है और वह केवल शासन तंत्र पर दबाव बनाकर सत्ता में रहना चाहती है।

​कुल मिलाकर, यह बयान दर्शाता है कि आने वाले दिनों में बंगाल की चुनावी जंग पर दोनों पक्षों की ओर से यह बयान बाजी अभी चलेगा और 04 मई क़ो रिजल्ट आने के बाद ही इस पर विराम लगेगा.

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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