August 20, 2026

*’वंदे मातरम’ के गायन पर गहराया राजनीतिक घमासान: विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कांग्रेस पर लगाया राष्ट्रगीत के अपमान का आरोप*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

👍​विहिप का तीखा हमला: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ का पूरा गायन न कराकर इसका सार्वजनिक अपमान किया है।

👍​सांस्कृतिक शब्दों से परहेज का आरोप: विहिप के अनुसार, राष्ट्रगीत के उत्तरार्ध में शामिल ‘धर्म, शक्ति, भक्ति, मंदिर और दुर्गा’ जैसे सांस्कृतिक व राष्ट्रीय मूल्यों से जुड़े शब्दों के कारण कांग्रेस पूरा गीत गाने से हिचकिचाती है।

👍​कानूनी कार्रवाई की चेतावनी: विहिप प्रवक्ता ने राष्ट्र सम्मान के प्रतीकों से जुड़े नए अधिसूचित कड़े कानूनों का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रगीत का असम्मान करने वालों के खिलाफ जेल जाने तक की कार्रवाई हो सकती है।

👍​कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी 1937 में महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर की सहमति से पारित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का पालन करती है, जिसमें सर्वसमावेशी भावना के तहत पहले दो छंदों के गायन का निर्णय लिया गया था।

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रविंद्र कुमार, संपादक /​नई दिल्ली/20 अगस्त 2026 :: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ (X) पर एक पोस्ट साझा कर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर ‘वंदे मातरम’ और भारतीय संस्कृति के अनादर का आरोप लगाया है।

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👍*विश्व हिंदू परिषद का दवा*

​विहिप प्रवक्ता विनोद बंसल ने अपने बयान में दावा किया कि कांग्रेस केवल ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंद (स्टैंजा) ही गाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि गीत के शेष भाग में ‘धर्म, मर्म, शक्ति, भक्ति, मंदिर, वाणी, विद्या और दुर्गा’ जैसे विशिष्ट शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो भारत के पुरातन संस्कारों और राष्ट्रीय जीवन मूल्यों से गहराई से जुड़े हैं। बंसल ने इसे “तुष्टिकरण की राजनीति” से प्रेरित मानसिकता करार दिया।

​इसके साथ ही, विहिप नेता ने राष्ट्र सम्मान के अपमान को रोकने से संबंधित कड़े कानूनों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि किसी भी नागरिक या संगठन द्वारा राष्ट्रीय प्रतीकों का असम्मान किए जाने पर सख्त कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।

👍*​कांग्रेस की सफाई*

दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार और भ्रामक बताया है। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि अक्टूबर 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर एक प्रस्ताव स्वीकार किया गया था। इस प्रस्ताव के तहत ही सार्वजनिक और राष्ट्रीय मंचों पर ‘वंदे मातरम’ के पहले दो छंदों को गाने की परंपरा तय की गई थी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी स्वतंत्रता संग्राम के नेताओं द्वारा तय की गई इसी परंपरा का पालन कर रही है और राष्ट्रगीत के प्रति उसके मन में पूर्ण सम्मान है।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​’वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना और राष्ट्रीय ऊर्जा का प्रतीक रहा है। 1937 में स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इसके प्रथम दो छंदों को सर्वस्वीकार्य रूप देने का निर्णय देश की विविधता और सामूहिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की दृष्टि से लिया गया था। हालांकि, वर्तमान दौर में राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक संदर्भों को लेकर होने वाली तीखी बयानबाजी अक्सर वैचारिक ध्रुवीकरण का रूप ले लेती है। 

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​एक परिपक्व लोकतंत्र में राष्ट्रगीत, राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान जैसे प्रतीक सर्वोपरि होते हैं। राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे राष्ट्रीय गौरव के विषयों पर आरोप-प्रत्यारोप के बजाय इनके ऐतिहासिक महत्व और संवैधानिक मर्यादाओं का सम्मान बनाए रखें, ताकि यह चेतना देश को विभाजित करने के बजाय एकजुट करने का कार्य करे। 

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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