August 22, 2026

*बिहार में प्रशासनिक अराजकता: अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल उल्लंघन पर राजद का हमला, एजाज अहमद बोले— ‘लोक पर हावी हुआ तंत्र’*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

👍​अधिकारियों पर मनमानी का आरोप: राजद नेता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि बिहार में नौकरशाही जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, पंचायती राज प्रतिनिधि) के मान-सम्मान और प्रोटोकॉल का लगातार उल्लंघन कर रही है।

👍​मधुबनी घटना का उल्लेख: मधुबनी में जिलाधिकारी की सांसद-विधायकों के साथ बैठक में अधिकारियों के न पहुंचने के कारण बैठक रद्द करनी पड़ी, जिसे स्वतंत्र भारत के इतिहास में अभूतपूर्व बताया गया।

👍​प्रशासनिक नियंत्रण पर सवाल: बार-बार प्रोटोकॉल अनुपालन के लिए पत्राचार जारी करना यह दर्शाता है कि राज्य सरकार का प्रशासनिक इकबाल समाप्त हो चुका है।

👍​संरक्षण देने का दावा: राजद का आरोप है कि एनडीए सरकार के शीर्ष नेताओं द्वारा अधिकारियों को दिए जा रहे संरक्षण के कारण उनका मनोबल बढ़ा है।

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रविंद्र कुमार,संपादक/​पटना /22 अगस्त 2026 ::​​ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता एजाज अहमद ने बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था पर नौकरशाही हावी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों की लगातार की जा रही उपेक्षा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही है।

​राजद नेता ने कहा कि राज्य सरकार को अधिकारियों और पदाधिकारियों को यह याद दिलाने के लिए बार-बार पत्र जारी करने पड़ रहे हैं कि वे जनप्रतिनिधियों (सांसदों, विधायकों और पंचायती राज प्रतिनिधियों) के फोन उठाएं, उनके कार्यों को प्राथमिकता दें और प्रोटोकॉल का पालन करें। इसके बावजूद धरातल पर अधिकारी इन आदेशों और जनप्रतिनिधियों के मान-सम्मान की अनदेखी कर रहे हैं।

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​हालिया घटनाक्रम का संदर्भ देते हुए एजाज अहमद ने बताया कि मधुबनी में जिलाधिकारी द्वारा सांसदों और विधायकों के साथ आयोजित महत्वपूर्ण बैठक को इसलिए स्थगित करना पड़ा क्योंकि संबंधित अधिकारी बैठक में पहुंचे ही नहीं। उन्होंने इसे आजादी के बाद की ऐतिहासिक घटना करार देते हुए कहा कि अधिकारियों की गैर-मौजूदगी के कारण जनप्रतिनिधियों की बैठक रद्द होना यह स्पष्ट करता है कि राज्य में ‘लोक’ पर ‘तंत्र’ हावी हो चुका है।

​एनडीए सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वर्तमान शासन में ही अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल का इस कदर उल्लंघन क्यों हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के भीतर बैठे बड़े नेताओं द्वारा ऐसे अधिकारियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनका मनोबल बढ़ा है और वे जनप्रतिनिधियों के प्रति अपनी जवाबदेही से पीछे हट रहे हैं।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज और उनकी आकांक्षाओं के प्रत्यक्ष वाहक होते हैं। जब प्रशासनिक अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन, पत्रों या आधिकारिक बैठकों को नजरअंदाज करने लगें, तो यह केवल किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस जनता का अनादर है जिसने उन्हें चुना है। राज्य सरकार द्वारा अधिकारियों को प्रोटोकॉल याद दिलाने के लिए बार-बार पत्राचार करना प्रशासनिक कसावट के अभाव को उजागर करता है। किसी जिले में अधिकारियों के न आने से सांसदों-विधायकों की बैठक का रद्द होना प्रशासनिक जवाबदेही के पतन का गंभीर संकेत है। लोकतंत्र की सुचिता और मजबूती के लिए आवश्यक है कि नौकरशाही (कार्यपालिका) जनप्रतिनिधियों (विधायिका) के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील रहे, अन्यथा शासन व्यवस्था से आम जनता का विश्वास उठने लगता है।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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