*नवी मुंबई में 20 दिसंबर को ऐतिहासिक ‘विराट कायस्थ महासम्मेलन’, ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस ने कसी कमर; समितियों का हुआ गठन*
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#न्यूज़हाईलाइट्स:
👍आयोजन स्थल और तिथि: ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (GKC) द्वारा आगामी 20 दिसंबर को महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित खारघर में भव्य ‘विराट कायस्थ महासम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा।
👍नेतृत्व और उद्देश्य: जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के नेतृत्व और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन में होने वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी सहयोग, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान देना है।
👍*प्रमुख नियुक्तियां एवं जिम्मेदारियां*
👌सम्पूर्ण तैयारी समिति: राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार
👌ड्राफ्टिंग समिति: राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. आदित्य नाग
👌स्वागत एवं भोजन समिति: महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव.
👌सुनील कुमार (स्वागत मंत्री) और उपाध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव.
👌कला एवं संस्कृति समिति: ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार (संयोजक) एवं ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना (सह-संयोजक)
👌आईटी एवं डिजिटल समिति: महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मनीष प्रभाकर (आईटी) और ग्लोबल संगठन सचिव शुभ्रांशु श्रीवास्तव (डिजिटल)
👌स्टेज समिति: सुनील कुमार (संयोजक) एवं संजय कामता प्रसाद (सह-संयोजक)
👍वैश्विक भागीदारी: इस महासम्मेलन में देश-विदेश से कायस्थ समाज के प्रतिनिधियों के शामिल होने की व्यापक संभावना है।

🌹==========================🌹 रविंद्र कुमार, संपादक /पटना/नवी मुंबई/18 अक्टूबर 2026 :: वैश्विक स्तर पर कायस्थ समाज को संगठित और सशक्त बनाने के लिए सक्रिय संस्था ‘ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस’ (GKC) ने आगामी 20 दिसंबर को नवी मुंबई के खारघर में एक विराट कायस्थ महासम्मेलन आयोजित करने की घोषणा की है। इस ऐतिहासिक आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने और तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए विभिन्न कमेटियों का गठन कर प्रमुख पदाधिकारियों को अहम जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

जीकेसी के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद के नेतृत्व और प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन के मार्गदर्शन में यह महासम्मेलन आयोजित हो रहा है। इस आयोजन का मूल उद्देश्य देश-विदेश के कायस्थ प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाना, सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना तथा समाज की सांस्कृतिक विरासत और बौद्धिक उपलब्धियों को राष्ट्रव्यापी पहचान दिलाना है।

👍*सुव्यवस्थित संचालन के लिए समितियों का गठन*
कार्यक्रम की भव्यता और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए जीकेसी ने कई कार्यकारी समितियों का गठन किया है:
🌹संपूर्ण प्रबंधन व समन्वय: महासम्मेलन की सम्पूर्ण तैयारी समिति की कमान राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार को सौंपी गई है, जो सभी व्यवस्थाओं का बारीकी से समन्वय करेंगे।
🌹ड्राफ्टिंग एवं रूपरेखा: वैचारिक और नीतिगत रूपरेखा तैयार करने के लिए ड्राफ्टिंग समिति का दायित्व राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. आदित्य नाग को दिया गया है।
🌹आतिथ्य और भोजन व्यवस्था: महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव सुनील कुमार को ‘स्वागत मंत्री’ नियुक्त किया गया है, जबकि प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव स्वागत समिति के साथ-साथ भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे।
🌹सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: कायस्थ समाज की सांस्कृतिक धरोहर को प्रदर्शित करने के लिए कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ के ग्लोबल कार्यकारी अध्यक्ष प्रेम कुमार को संयोजक तथा ग्लोबल महासचिव पवन सक्सेना को सह-संयोजक बनाया गया है।
🌹तकनीकी एवं डिजिटल संचालन: डिजिटल युग की आवश्यकताओं को देखते हुए आईटी समिति का प्रभार महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष मनीष प्रभाकर को तथा डिजिटल समिति का दायित्व ग्लोबल संगठन सचिव शुभ्रांशु श्रीवास्तव को सौंपा गया है।
🌹मंच सज्जा एवं प्रबंधन: स्टेज समिति के संयोजक की जिम्मेदारी सुनील कुमार (महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव) और सह-संयोजक की जिम्मेदारी संजय कामता प्रसाद (महाराष्ट्र प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष) को दी गई है।

👍*ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद का संदेश*
ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि यह महासम्मेलन समाज की संगठनात्मक शक्ति और सामूहिक सहभागिता को प्रदर्शित करने का एक स्वर्णिम अवसर है। प्रबंध न्यासी रागिनी रंजन ने कहा कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग को निकट लाकर साझा उद्देश्यों पर मिलकर काम करने की पहल है। राष्ट्रीय महासचिव नवीन कुमार ने विश्वास जताया कि सभी समितियों के आपसी समन्वय से यह आयोजन मील का पत्थर साबित होगा।

🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹
**बदलाव की आहट और सामाजिक पुनर्जागरण की दिशा में एक सार्थक कदम**
वैश्वीकरण और भागदौड़ भरी आधुनिकीकरण की आंधी में आज कई पारंपरिक और वैचारिक समाज अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे दौर में ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेंस (GKC) द्वारा नवी मुंबई में आयोजित होने जा रहा ‘विराट कायस्थ महासम्मेलन’ केवल एक राजनीतिक या सामाजिक सभा नहीं, बल्कि बौद्धिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक प्रभावी प्रयास प्रतीत होता है।

इतिहास गवाह रहा है कि कायस्थ समाज ने अपनी वैचारिक क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और संस्कृति प्रेम के बल पर राष्ट्र निर्माण में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है। हालांकि, समय के साथ इस वर्ग को भी संगठनात्मक सुदृढ़ीकरण और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने की आवश्यकता महसूस हो रही है। इस महासम्मेलन के माध्यम से देश-विदेश के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाना और डिजिटल व तकनीकी समितियों के जरिए आधुनिक युग के अनुरूप तालमेल बिठाना जीकेसी की दूरगामी सोच को दर्शाता है। यदि यह आयोजन बिना किसी अंतर्विरोध के अपनी तय कार्ययोजना के तहत आगे बढ़ता है, तो यह देश अन्य समाजों के लिए भी एकजुटता और सकारात्मक सहभागिता का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर सकता है।
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