*”सिनेमा हॉल छोड़ YouTube के भरोसे रहना निर्माताओं के लिए घातक- मुरली लालवानी”*

रविंद्र कुमार, संपादक /पटना/मुंबई 11 अप्रैल 2026 :: भोजपुरी और मराठी फिल्मों के जाने-माने लेखक-निर्देशक मुरली लालवानी ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए भोजपुरी फिल्म जगत की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इंडस्ट्री के बड़े निर्माताओं और दिग्गजों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अगर समय रहते ‘नई सोच’ और ‘नए निर्देशकों’ को मौका नहीं दिया गया, तो इंडस्ट्री का भविष्य अंधकारमय हो सकता है।
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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*प्रतिभा बनाम दिखावा*: इंडस्ट्री में ‘बोल-बच्चन’ करने वाले ठग सक्रिय हैं, जबकि असली टैलेंट को ब्रेक नहीं मिल रहा।
*निर्माताओं की बर्बादी*: फिल्मों को सीधे यूट्यूब (YouTube) पर रिलीज करना और सिनेमा हॉल से दूरी बनाना प्रोड्यूसरों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
*चैनलों का रवैया*: टीवी चैनल कौड़ियों के भाव में फिल्में मांग रहे हैं, जिससे फिल्म की मेकिंग वैल्यू गिर रही है।
*नए विजन की मांग*: मनोरंजन मिश्रा जैसे नए और ऊर्जावान निर्देशकों को मौका देने की पुरजोर वकालत।
*घिसी-पिटी कहानियां*: एक ही ढर्रे की कहानियों को पब्लिक पर थोपने से दर्शकों का मोहभंग हो रहा है।
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*विस्तृत रिपोर्ट: आखिर क्यों संकट में है भोजपुरी सिनेमा?*
निर्देशक मुरली लालवानी ने अपने बेबाक बयान में कहा कि आज भोजपुरी इंडस्ट्री में काबिल निर्देशकों की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें काम मिलने के बजाय उन लोगों को तरजीह दी जा रही है जो सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें (भोकाल) करना जानते हैं। उन्होंने बड़े निर्माताओं से गुजारिश की है कि वे पुराने चेहरों को साइड में रखकर नए टैलेंटेड निर्देशकों के साथ काम करें ताकि इंडस्ट्री को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाया जा सके।

*यूट्यूब बना ‘लास्ट स्टेज’ या ‘बर्बादी का कारण’?*
लालवानी ने एक कड़वा सच उजागर करते हुए कहा कि फिल्में बड़े कैमरों और भारी बजट से शुरू तो होती हैं, लेकिन अंत में सीधे यूट्यूब पर सिमट कर रह जाती हैं।
उन्होंने जोर दिया कि फिल्म का असली सफर पहले सिनेमा हॉल -> टीवी ->लास्ट में यूट्यूब होना चाहिए।
सीधे यूट्यूब पर जाने से निर्माता की लागत नहीं निकल पाती। उन्होंने सलाह दी कि यदि फिल्म यूट्यूब के लिए ही बनानी है, तो भारी खर्च करने के बजाय छोटे कैमरों का उपयोग करें ताकि कम से कम निर्माता बर्बाद न हो।

*चैनलों और डिस्ट्रीब्यूशन का बिगड़ा गणित*
पिछले 7-8 महीनों में आई गिरावट पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मेकर्स ने खुद ही अपनी फिल्मों को सस्ते में चैनलों को देकर उनकी आदत खराब कर दी है। अब चैनल महंगी फिल्मों को भी सस्ते में खरीदने की जिद करते हैं। साथ ही, कुछ खरीदार फिल्म लेकर पैसा नहीं देते, जिससे मामला कोर्ट-कचहरी तक पहुँच जाता है।

*टैलेंट को मौका दिया लेकिन कभी भोपाल नहीं मचाया*
मुरली लालवानी ने कहा कि हमने कभी टैलेंटेड एवं नये लोगो को दरकिनार नहीं किया. कई कलाकारो और म्यूजिक डायरेक्टर,सिंगर,गीतकार को ब्रेक दिया है, वो भी बिना भोकाल मचाये.
लेकिन अब समय गया है….बड़े निर्माता टैलेंटेड लोगो को मौका दें, नये डायरेक्टरों को ब्रेक दे ,रिस्क का ना सोचे अच्छा ही होगा.

*निष्कर्ष और अपील*
मुरली लालवानी ने अंत में भावुक होते हुए कहा, “हमें अपनी भाषा और इंडस्ट्री को बचाना है। मनोरंजन मिश्रा जैसे कई नए डायरेक्टर हैं जिनके पास नई ऊर्जा और नई सोच है। भोजपुरी लेखक के पास आज घिसी-पिटी कहानियां तो हजारों की संख्या में हैं, लेकिन उनसे इंडस्ट्री का भला नहीं होने वाला है । भोजपुरी के जो बड़े निर्माता हैं, उनको आगे आना होगा…. अच्छी कहानी,कसा हुआ स्क्रिप्ट, अच्छे गीतकार,अच्छे संगीतकार,अच्छे लेखक,अच्छे निर्देशको का चयन करना होगा.
उन्होंने आगे कहा कि बड़े फिल्म निर्माता इन टैलेंटेड लेखको और निर्देशको को मौका दें… बस एक मौका देकर तो देखिए, बदलाव जरूर होगा.
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