April 13, 2026

*कार्यकर्ता अरशद नसर ने कहा कि कथित भ्रस्ट अधिकारियो के खिलाफ अविलंब कार्यवाई नहीं की गई, तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे*

रविंद्र कुमार,संपादक/​साहिबगंज/07 अप्रैल 2026 :: झारखंड के साहिबगंज जिले में अवैध खनन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण प्रेमी *सैयद अरशद नसर* ने जेल से बाहर आते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा दिया है। अरशद नसर ने साहिबगंज के *SDPO किशोर तिर्की* और खनन पदाधिकारी (DMO) *कृष्ण कुमार किस्कू* सहित कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की मांग की है।

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#न्यूज़हाइलाइट्स (News Highlights):

​⚡ *बड़ा कदम*: जेल से निकलते ही सैयद अरशद नसर ने भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ शुरू की कानूनी लड़ाई।

​📝 *शिकायत*: SDPO, DMO और कांड के अनुसंधानकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए मुख्यमंत्री और DGP को भेजा आवेदन।

​⚖️ *दावा*: पत्थर माफियाओं और अधिकारियों की सांठगांठ से मुझे झूठे केस में फंसाकर एक साल जेल में रखा गया।

​🚨 *चेतावनी*: कार्रवाई न होने पर मानवाधिकार आयोग और न्यायालय जाने की दी अंतिम चेतावनी।

​💥 *असर*: अरशद के इस कदम से साहिबगंज के पत्थर कारोबारियों और प्रशासनिक हलकों में मची खलबली।

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*​मुख्यमंत्री और डीजीपी को भेजा 5 पन्नों का शिकायती पत्र*

​मंगलवार को अरशद नसर ने स्पीड पोस्ट के माध्यम से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, DGP तदाशा मिश्रा, दुमका IG, साहिबगंज DC और SP समेत खनन सचिव को 5 पन्नों का एक विस्तृत आवेदन भेजा है। इस आवेदन में उन्होंने अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता-2023 की सुसंगत धाराओं के तहत कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।

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*​आरोप: ‘साजिश के तहत फंसाया, एक साल तक काटा जेल’*

​अरशद नसर का आरोप है कि जिरवाबाड़ी थाना कांड संख्या-104/24 और 204/24 में उन्हें पूरी तरह झूठा फंसाया गया था। उनके अनुसार:

*​अनैतिक सांठगांठ*: पूर्व की रंजिश के कारण खनन पदाधिकारी कृष्ण कुमार किस्कू ने पत्थर माफियाओं और भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची।

*​मानवाधिकारों का हनन*: अरशद ने कहा कि निर्दोष होने के बावजूद उन्हें करीब एक साल जेल में रहना पड़ा, जो उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

*​भ्रष्टाचार का आरोप*: आवेदन में SDPO किशोर तिर्की, अनुसंधानकर्ता लव कुमार, दीपक क्रिएशन, मो. शाहरुख और खनन पदाधिकारी को कटघरे में खड़ा किया गया है।

​न्यायालय और मानवाधिकार आयोग जाने का ‘अल्टीमेटम’

​सामाजिक कार्यकर्ता ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन अधिकारियों के खिलाफ अविलंब FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे न्याय के लिए उच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
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