April 23, 2026

*सीतामढ़ी-रक्सौल ‘लाइफलाइन’ ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्री बेहाल; कैट (CAIT) ने रेल प्रशासन से की अविलंब कार्रवाई की मांग*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

*​पटरी से उतरी समय सारणी*: सीतामढ़ी-रक्सौल-सीतामढ़ी लोकल ट्रेनें (55577/55578) प्रतिदिन 2 से 3 घंटे की देरी से चल रही हैं।

*​यात्रियों की परेशानी*: अस्पताल, स्कूल, और सरकारी-निजी कार्यालयों में काम करने वाले हजारों कामगार और महिलाएं प्रभावित।

*​आंकड़ों में देरी*: पिछले 4 दिनों में ट्रेन संख्या 55577 अधिकतम 3 घंटे 17 मिनट और 55578 अधिकतम 3 घंटे 8 मिनट लेट हुई।

*​आंदोलन की चेतावनी*: केन्द्रीय रेलवे रेलयात्री संघ और कैट (CAIT) ने रेलवे से ट्रेनों को नियत समय पर चलाने हेतु अविलंब हस्तक्षेप की मांग की।

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**​विस्तृत समाचार: ट्रेनों की लेटलतीफी ने छीना यात्रियों का चैन**

रविंद्र कुमार,संपादक/​सीतामढ़ी/23 अप्रैल 2026 :: उत्तर बिहार की महत्वपूर्ण रेल खंड सीतामढ़ी-रक्सौल पर ट्रेनों की निरंतर लेटलतीफी ने आम यात्रियों और व्यापारियों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। केन्द्रीय रेलवे रेलयात्री संघ एवं कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इण्डिया ट्रेडर्स (कैट), सीतामढ़ी के जिलाध्यक्ष राजेश कुमार सुन्दरका ने रेलवे के ढुलमुल रवैये पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अविलंब कार्रवाई की मांग की है।

*​कामगारों और महिलाओं पर दोहरी मार:*

जिलाध्यक्ष *राजेश कुमार सुन्दरका* ने कहा कि समस्तीपुर-रक्सौल ट्रेन संख्या 55577/55578 इस क्षेत्र की आर्थिक रीढ़ है। इसमें बड़ी संख्या में पुरुष व महिला कामगार, शिक्षक, स्वास्थ्य कर्मी और बिजली विभाग जैसे आवश्यक सेवाओं के कर्मचारी सफर करते हैं। ट्रेन के घंटों लेट होने के कारण लोग समय पर दफ्तर नहीं पहुँच पा रहे हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

*​पिछले 4 दिनों का रिपोर्ट कार्ड (देरी का विवरण):*

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कैट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, ट्रेनों की स्थिति भयावह है:

​*ट्रेन संख्या 55577 (सीतामढ़ी से रक्सौल – नियत समय 7:20 AM):*

​23 अप्रैल: 2 घंटा 17 मिनट लेट

​20 अप्रैल: 3 घंटा 17 मिनट लेट

​*ट्रेन संख्या 55578 (रक्सौल से सीतामढ़ी – नियत समय 6:50 PM):*

​22 अप्रैल: 3 घंटा 08 मिनट लेट

​19 अप्रैल: 2 घंटा 53 मिनट लेट.

*​आर्थिक और मानसिक नुकसान:*

कैट के सचिव *आलोक कुमार* ने कहा कि इस रूट पर ट्रेनों की संख्या पहले से ही सीमित है, ऊपर से मौजूदा ट्रेनों का लेट चलना यात्रियों के लिए सजा जैसा है। विशेषकर महिलाओं को देर रात घर लौटने में सुरक्षा और घरेलू जिम्मेदारियों के मोर्चे पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रेलवे प्रशासन की इस लापरवाही से यात्रियों में भारी रोष व्याप्त है।

*​संपादकीय विश्लेषण: रेलवे की प्राथमिकता में कहाँ है ‘लोकल’ यात्री?*

​सीतामढ़ी-रक्सौल रेल खंड पर ट्रेनों का यह विलंब केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का संकेत है। अक्सर देखा जाता है कि एक्सप्रेस और मालगाड़ियों को ‘थ्रू’ पास देने के चक्कर में पैसेंजर ट्रेनों को आउटर सिग्नल या स्टेशनों पर घंटों खड़ा कर दिया जाता है।

​1. *स्थानीय अर्थव्यवस्था पर चोट*: जब किसी क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ ट्रेनें पटरी से उतरती हैं, तो उसका सीधा असर स्थानीय व्यापार और श्रम उत्पादकता पर पड़ता है।

2. *सुरक्षा का प्रश्न*: शाम की ट्रेन (55578) का 3 घंटे लेट होना महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है।

3. *जवाबदेही की कमी*: रेलवे को यह समझना होगा कि पैसेंजर ट्रेनें केवल राजस्व का जरिया नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा का माध्यम हैं। यदि समयबद्धता (Punctuality) में सुधार नहीं हुआ, तो यह रेल प्रशासन के प्रति जनता के विश्वास को पूरी तरह खत्म कर देगा।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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