*सभ्यता संस्कृति मुल्यों के बेहतरीन संरक्षक शिक्षक हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और दिशा प्रदान करते हैं — राजीव रंजन प्रसाद*

रविंद्र कुमार,संपादक/पटना :: शिक्षक दिवस के अवसर पर दीदी जी फाउंडेशन, पटना द्वारा एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन हर्षा बैंकटहाल, तेज प्रताप नगर में आयोजित की गयी। कार्यक्रम का उद्घाटन जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और स्वर्ण आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने किया. 
कार्यक्रम के उदघाटन उपरांत अपने सम्बोधन में जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और स्वर्ण आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि शिक्षा ही समाज के परिवर्तन की वाहक है, समाज में व्याप्त तकलीफ को शिक्षा के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज की धुरी हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को ज्ञान, संस्कार और दिशा प्रदान करते हैं।

मुख्य अतिथि पटना ला कॉलेज कालेज के पूर्व प्राचार्य मोहम्मद शरीफ , विशिष्ट अतिथि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती, लैंगवेज विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति मोहम्मद मसूद आलम और मुख्य वक्ता पसमांदा आन्दोलन के चिन्तक शिक्षाविद् प्रो०फिरोज मंसूरी तथा कार्यक्रम संयोजन दीदी जी फाउंडेशन के सूत्रधार नम्रता आनन्द थी एवं मंच संचालन दीप शिखा ने की।

कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों एवं शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्चलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। इस अवसर पर समाज में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों, विद्वानों एवं सामाजिक कार्यकताओं को “डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रीय सम्मान 2025” से सम्मानित किया गया।

सम्मान पाने वालों में प्रोफेसर मसूद आलम , प्रोफेसर मोहम्मद शरीफ, दीप श्रेष्ट , प्रोफेसर फिरोज मंसूरी , नूतन कुमारी , मोहम्मद महफूज आलम, अजय कुमार, डिम्पल जासमीन, डॉ०पंकज सिंहा , सोनिया सिंह, विश्वस्वरुप धवन, पवन कुमार , शाईस्ता नागरीना को राष्ट्रीय सम्मान 2025 से उनके उत्कृष्ट शिक्षा सेवा में योगदान को देखकर दिया गया।

मुख्य अतिथि प्रोफेसर मसूद आलम ने कहा कि राष्ट्र के उन्नति का मार्ग केवल शिक्षा से ही प्रशस्त किया जा सकता है.शिक्षा की अलख जगाना सावित्री बाई फूले की याद ताजा करती है।
शिक्षक दिवस को सम्बोधित करते हुए जाने माने विधि विशेषज्ञ प्रो.फेसरीफ ने कहा की मूल्यों से हो हो परिचित करता है यही बुक्ति का मार्ग है.
प्रो० फिरोज वैसूरी ने कहा को शिक्षक दिवस केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि का अवसर हमें शिक्षा और शिक्षकों के महत्व को समझने और उनके प्रति आभार व्यक्त करने का है जब अपने प्रथम गुरु माता पिता एवं गजनों के ऋण को याद रखने का अवसर भी देता है।

कार्यक्रम संयोजक एवं दीदी जी फाउंडेशन बताया कि संस्था हमेशा समाज में शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास के लिए प्रयासरत ही है। यह सम्मान शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने और समाज में शिक्षा के को और व्यापक स्तर पर फैलाने की दिशा में एक पहल है।

कार्यक्रम में समीर परिमल, आनन्द मधुकर, पवन अग्रवाल, दिवाकर वर्मा, शिखा स्वरूप, अनिलता कुमारी, मोहनकुमार चन्द्र शेखर , अशोक नागवंशी एवं बड़ी संख्या में शिक्षक, अभिभावक एवं समाजसेवी शामिल हुए।
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