*कायस्थ अस्मिता और गौरव का नया अध्याय ,भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति, कायस्थों के गौरवशाली इतिहास और उनकी सांस्कृतिक परंपराओं का गहन शोध-ग्रन्थ*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
*मुख्य आयोजन*: लेखक और वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र कुमार सिन्हा की दूसरी पुस्तक ‘कायस्थ विरासत’ का पटना में गरिमापूर्ण विमोचन।
*विषय वस्तु*: सृष्टि के लेखाकार भगवान चित्रगुप्त की उत्पत्ति, कायस्थों के गौरवशाली इतिहास और उनकी सांस्कृतिक परंपराओं का गहन शोध।
*लेखक परिचय*: समाजसेवा और पत्रकारिता में सक्रिय जितेन्द्र कुमार सिन्हा की यह ‘शिव तत्त्व’ के बाद दूसरी सफल साहित्यिक कृति है।
*प्रमुख उपस्थिति*: समारोह में बिहार के पूर्व महालेखाकार, राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य और कई उच्चाधिकारियों सहित बुद्धिजीवियों की भागीदारी।
*सामाजिक उद्देश्य*: आधुनिक पीढ़ी को अपनी जड़ों और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ने की एक वैचारिक पहल।
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पटना /19 अप्रैल, 2026 :: बिहार की राजधानी पटना के आशियाना-दीघा स्थित ‘विशाल आदित्य अपार्टमेंट’ में आयोजित एक विशेष समारोह में लेखक, पत्रकार और समाजसेवी जितेन्द्र कुमार सिन्हा की बहुप्रतीक्षित पुस्तक ‘कायस्थ विरासत’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक कायस्थ समाज के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सफर को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है।
*सांस्कृतिक जड़ों की खोज:*

पुस्तक के केंद्र में सृष्टि के प्रथम लेखाकार और न्याय के देवता भगवान चित्रगुप्त हैं। लेखक ने अत्यंत बारीकी से उनके वंशजों के इतिहास, कायस्थ समाज की विशिष्ट पहचान और समाज निर्माण में उनके योगदान पर शोधपूर्ण तथ्य प्रस्तुत किए हैं। विमोचन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक उन अनछुए पहलुओं को उजागर करती है जो अब तक इतिहास के पन्नों में ओझल थे।
*साहित्यिक यात्रा का अगला पड़ाव:*

विदित हो कि जितेन्द्र कुमार सिन्हा की पहली कृति ‘शिव तत्त्व’ (विमोचन: 6 फरवरी 2026) को भी पाठकों और विद्वानों की ओर से भरपूर सराहना मिली थी। ‘कायस्थ विरासत’ के माध्यम से उन्होंने न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक चेतना को भी स्वर दिया है। उनकी शैली में तथ्यों की प्रामाणिकता और संवेदना का अनूठा संगम दिखता है।
*विशिष्ट अतिथियों का संगम:*

लोकार्पण समारोह की गरिमा को बढ़ाते हुए कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व मंच पर उपस्थित रहे। इनमें महालेखाकार (बिहार) से सेवानिवृत्त शशि भूषण प्रसाद, राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के सदस्य सुरेन्द्र कुमार रंजन, पटना उच्च न्यायालय की प्रशाखा पदाधिकारी पूजा सबनम, और कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के पंकज कुमार प्रमुख रहे। इसके साथ ही बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के धर्मेश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार आभा सिन्हा और कई अन्य बुद्धिजीवियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

*भविष्य की पीढ़ी के लिए मार्गदर्शिका:*
कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि अपनी विरासत को जानना और उसे संरक्षित रखना ही किसी भी समाज की उन्नति का आधार है। ‘कायस्थ विरासत’ केवल एक जाति विशेष की पुस्तक न होकर भारतीय समाज की विविधता और उसके बौद्धिक विकास को समझने का एक माध्यम है।
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