*”महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी दुनिया को कविता ही दिखाएगी राह” : पटना में ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ का भव्य लोकार्पण*

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*न्यूज़ हाइलाइट्स (मुख्य अंश)*
*वैश्विक संकट और साहित्य*: प्रो. राम वचन राय ने कहा कि युद्ध की विभीषिका से दुनिया को बचाने की शक्ति केवल कविता और कला में है।
*पुस्तक लोकार्पण*: दिवंगत विद्वान प्रो. सियाराम तिवारी द्वारा संकलित और डॉ. विद्या चौधरी द्वारा संपादित काव्य-संग्रह ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ का विमोचन।
*मातृभाषा का गौरव*: डॉ. अनिल सुलभ ने जनपदीय भाषाओं को ‘पुण्य-सलीला नदियाँ’ बताया, जिनसे ‘हिन्दी की गंगा’ समृद्ध होती है।
*विद्वानों का सम्मान*: बज्जिका साहित्य की सेवा के लिए 5 वरिष्ठ साहित्यकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
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विजय सिंह/पटना, 01मार्च 2026 :: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रांगण में रविवार को राष्ट्रीय बज्जिका भाषा परिषद के तत्वावधान में एक गरिमामयी साहित्य-उत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बज्जिका भाषा के महत्वपूर्ण संकलन ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ का लोकार्पण मुख्य अतिथि, बिहार विधान परिषद के उप सभापति प्रो. राम वचन राय द्वारा किया गया।

*कलम और कविता की शक्ति सर्वोपरि*
समारोह को संबोधित करते हुए प्रो. राम वचन राय ने एक गंभीर वैश्विक परिप्रेक्ष्य रखा। उन्होंने कहा, “आज दुनिया महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी है। ऐसी स्थिति में केवल कविता और कला जैसी सारस्वत विधाएँ ही समाज को संस्कारित और सुरक्षित रख सकती हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अल्पसंख्यक संस्कृति, जो कला और संगीत को सहेजती है, वही वास्तव में समाज की नींव को मजबूत करती है। उन्होंने जनपदीय भाषाओं के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए इनके साहित्य पर गहन शोध की आवश्यकता बताई।

*हिन्दी की शक्ति हैं लोक-भाषाएँ*
सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में ‘बज्जिका’ को बिहार की मिट्टी की सुगंध वाली भाषा बताया। उन्होंने एक सुंदर रूपक का प्रयोग करते हुए कहा कि भारत की समस्त लोक-भाषाएं वे पवित्र नदियाँ हैं, जो मिलकर ‘हिन्दी’ रूपी विशाल गंगा का निर्माण करती हैं। ‘बज्जिका के लोढ़ल फूल’ संग्रह को उन्होंने लोक-जीवन के संस्कारों का दस्तावेज करार दिया।

*साहित्यिक योगदान का सम्मान*
कार्यक्रम के दौरान बज्जिका भाषा और साहित्य के प्रति समर्पित सेवा के लिए पाँच प्रख्यात विभूतियों को सम्मानित किया गया:
*साकेत बिहारी शर्मा ‘शितिकण्ठ’*
*अवधेश तृषित*
*अखौरी चन्द्रशेखर*
*उदय नारायण सिंह*
*शम्भु शरण मिश्र*

*गरिमामयी उपस्थिति*
समारोह में ई० राम नरेश शर्मा, देवेन्द्र राकेश, डॉ. मधु वर्मा, और डॉ. विद्या चौधरी सहित कई विद्वानों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर राजधानी के सैकड़ों साहित्य-प्रेमी और प्रबुद्ध जन उपस्थित थे, जिनमें वरिष्ठ कवयित्री आराधना प्रसाद, डॉ. अर्चना त्रिपाठी और सिद्धेश्वर प्रमुख रहे। कार्यक्रम का समापन रमेंद्र कुमार चौधरी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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