*”कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)” कहीं मनुष्य का हृदय न छीन ले: पटना में जुटे साहित्यकारों ने तकनीक के बेलगाम विस्तार पर जताई चिंता*
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*न्यूज़ हाइलाइट्स (News Highlights)*
*मुख्य आयोजन: ‘लेख्य-मंजूषा’ (पटना) और ‘अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय’ (बंगलुरु) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित साहित्योत्सव।*
*प्रमुख चेतावनी: एआई मानव बुद्धि की उपज है, लेकिन अनियंत्रित होने पर यह मानवीय संवेदनाओं और ‘हृदय’ के लिए खतरा बन सकता है।*
*साहित्यिक दायित्व: तकनीक के युग में समाज का मार्गदर्शन करना साहित्यकारों के लिए एक बड़ी चुनौती।*
*लोकार्पण: त्रैमासिक पत्रिका ‘साहित्यिक स्पंदन’ और लघुकथा-संग्रह ‘खिलते कुसुम’ का विमोचन।*
*सम्मान: डॉ. अनिल सुलभ को ‘डॉ. सतीशराज पुष्करणा स्मृति सम्मान’ से नवाजा गया।*
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विजय सिंह /पटना/15 मार्च 2026 :: बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के प्रांगण में रविवार को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और मानवीय मूल्यों के अंतर्संबंधों पर गहरा मंथन हुआ। ‘लेख्य-मंजूषा’ और ‘अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय’ द्वारा आयोजित इस संगोष्ठी में वक्ताओं ने दो-टूक कहा कि यदि तकनीक को मर्यादित नहीं रखा गया, तो यह मनुष्य की मेधा ही नहीं, बल्कि उसके भावों को भी सोख लेगी।

*तकनीक: वरदान या अभिशाप?*
सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने साहित्योत्सव का उद्घाटन करते हुए कहा कि वर्तमान विश्व एक बड़े युगांतर की दहलीज पर खड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई से अब बचा नहीं जा सकता, यह जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। डॉ. सुलभ ने आगाह किया, “एआई का सदुपयोग संसार को समृद्ध करेगा, लेकिन इसका दुरुपयोग विनाशकारी हो सकता है। साहित्यकारों का दायित्व है कि वे तकनीक के इस दौर में समाज को दिशा दिखाएं।”

*विमोचन और विमर्श:*
इस अवसर पर विभारानी श्रीवास्तव द्वारा संपादित पत्रिका ‘साहित्यिक स्पंदन’ और सविता भुवानिया के लघुकथा-संग्रह ‘खिलते कुसुम’ का लोकार्पण किया गया।
इसके बाद आयोजित संगोष्ठी में बंगलुरु, मैसूर और गाजियाबाद से आए विद्वानों ने ‘एआई के सदुपयोग’ पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि साहित्यिक संस्थाएं अब तकनीकी विषयों को भी अपने विमर्श का केंद्र बना रही हैं।

*काव्य धारा से सजी शाम:*
भोजनावकाश के बाद आयोजित कवि-सम्मेलन में देशभर से आए रचनाकारों ने अपनी कविताओं से समां बांध दिया। भगवती प्रसाद द्विवेदी की अध्यक्षता में हुए इस सत्र में सुधीर सिंह सुधाकर, डॉ. शशि भूषण सिंह और डॉ. शालिनी पाण्डेय सहित कई कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम का समापन प्रो. सुधा सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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