*गोपाल मिश्रा चुने गए IFWJ के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष; पत्रकारिता के समक्ष AI और आर्थिक संकट को बताया बड़ी चुनौती*

जितेंद्र कुमार सिंहा /नई दिल्ली /06 अप्रैल 2026 :: इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) ने एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत वरिष्ठ पत्रकार गोपाल मिश्रा को सर्वसम्मति से अपना नया राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित किया है। संगठन के 27 में से 14 राज्यों के निर्वाचक मंडल ने उनके नाम पर मुहर लगाई। यह घोषणा दिल्ली स्थित ‘जर्नलिस्ट यूनियन ऑफ दिल्ली’ (JUD) के कार्यालय में चुनाव अधिकारियों द्वारा विधिवत रूप से की गई।
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#मुख्यबिंदु (News Highlights):
*नेतृत्व परिवर्तन*: गोपाल मिश्रा, संगठन के कद्दावर नेता स्वर्गीय डॉ. के. विक्रम राव का स्थान लेंगे, जिनका निधन मई 2025 में हुआ था।
*चुनावी प्रक्रिया*: जोधपुर से शुरू हुई इस प्रक्रिया की निगरानी मुख्य निर्वाचन अधिकारी संतोष चतुर्वेदी और उनकी टीम ने की।

*अनुभव का आधार*: गोपाल मिश्रा टाइम्स ऑफ इंडिया और नेशनल हेराल्ड जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में वरिष्ठ पदों पर रहे हैं और देश का पहला इंटरनेट न्यूज पोर्टल शुरू करने का श्रेय भी उन्हें जाता है।
*प्रमुख मुद्दे*: पदभार संभालते ही उन्होंने डिजिटल युग में पत्रकारों की वेतन सुरक्षा और AI (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) से उत्पन्न खतरों को अपनी प्राथमिकता बताया।
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*समाचार विस्तार पूर्वक*

एक युग का अंत और नई शुरुआत IFWJ के संविधान की धारा 49 के तहत हुए इस चुनाव के परिणाम संगठन के लिए एक नई दिशा तय करेंगे। गोपाल मिश्रा उस पद को सुशोभित करने जा रहे हैं जिसे लंबे समय तक डॉ. के. विक्रम राव ने संभाला था। डॉ. राव न केवल एक प्रखर लेखक थे, बल्कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता के लिए जेल जाने वाले योद्धा भी थे। गोपाल मिश्रा के कंधों पर अब डॉ. राव की विरासत को आगे बढ़ाने और आधुनिक दौर की चुनौतियों से निपटने की दोहरी जिम्मेदारी है।

*AI और एल्गोरिदम के विरुद्ध संकल्प*
निर्वाचित होने के बाद अपने पहले संबोधन में गोपाल मिश्रा ने सीधे तौर पर पत्रकारों के अस्तित्व पर मंडरा रहे खतरों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट कहा:
”मशीनें या एल्गोरिदम किसी पत्रकार की रोजी-रोटी नहीं छीन सकते। हमारा प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बदलावों के बीच पत्रकारों को उनके श्रम का सही मूल्य मिले और उनकी नौकरी सुरक्षित रहे।”
उन्होंने पारंपरिक विज्ञापन राजस्व के मॉडल में आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए डिजिटल युग में ‘ठोस वेतन सुरक्षा’ के लिए लड़ने का आह्वान किया।

*अनुभवी हाथ में कमान*
गोपाल मिश्रा का करियर पत्रकारिता और शिक्षण का अनूठा संगम रहा है। पायनियर एम्प्लॉइज यूनियन की स्थापना से लेकर IIMC में अध्यापन तक, उनका अनुभव संगठन को मजबूती प्रदान करेगा। उनकी जीत पर ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव शिवगोपाल मिश्रा सहित देश के विभिन्न राज्यों (बिहार, यूपी, तमिलनाडु, झारखंड, असम आदि) के पत्रकार संगठनों ने उन्हें टेलीफोनिक और व्यक्तिगत रूप से बधाई दी है।

*IFWJ का गौरवशाली इतिहास*
1950 में जंतर-मंतर से शुरू हुआ यह संगठन आज 47 देशों में द्विपक्षीय संबंध रखता है। 1956 में पत्रकारों के लिए पहला संसदीय कानून बनवाने का श्रेय इसी संस्था को जाता है। अब गोपाल मिश्रा के नेतृत्व में यह संगठन समाचार कक्षों में बढ़ते ‘आर्थिक संकट’ के खिलाफ एक नई लड़ाई छेड़ने को तैयार है।
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