*पत्रकारों के लिए ‘सुरक्षा कवच’ बनेगा राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग: ₹10 लाख का बीमा और ‘राहत कोष’ का क्रांतिकारी प्रस्ताव*

जितेन्द्र कुमार सिन्हा /पटना /22 फरवरी, 2026 :: लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को मजबूती देने और पत्रकारों के ‘सुरक्षा, सम्मान व स्वाभिमान’ को सुनिश्चित करने की दिशा में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग ने एक ऐतिहासिक और संवेदनशील पहल की रूपरेखा तैयार की है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि पत्रकारिता अब केवल जोखिम भरा पेशा नहीं रहेगा, बल्कि संकट के समय संगठन एक परिवार की तरह हर सदस्य के पीछे खड़ा होगा।

*सामूहिकता की शक्ति: ₹2.50 लाख की तत्काल सहायता का मॉडल*
आयोग के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश कुमार शर्मा ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यवहारिक प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने “राहत कोष की स्थापना” पर जोर देते हुए गणितीय आधार पर इसकी शक्ति को समझाया।

*छोटा योगदान, बड़ा संबल*: यदि आयोग के लगभग 5000 पदाधिकारी किसी संकटग्रस्त साथी के लिए मात्र ₹50 का अंशदान करते हैं, तो देखते ही देखते ₹2,50,000 की बड़ी राशि एकत्र हो जाएगी।
*भावनात्मक मजबूती*: यह केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि एक संदेश है कि “आप अकेले नहीं हैं।” यह भरोसा पत्रकार को निर्भीकता से काम करने की ऊर्जा देगा।

*₹10 लाख का अनिवार्य बीमा: परिवार के लिए सुरक्षा कवच*
सुरेश कुमार शर्मा ने पत्रकारिता के दौरान आने वाले शारीरिक और मानसिक जोखिमों को देखते हुए प्रत्येक पत्रकार के लिए न्यूनतम ₹10 लाख के बीमा को अनिवार्य बनाने का दूरदर्शी प्रस्ताव दिया है। यह बीमा किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में पत्रकार के परिवार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच का काम करेगा।

*”स्थायी राहत कोष”: आत्मनिर्भर बनेगा संगठन*
संगठन की कार्यक्षमता और स्थिरता को बढ़ाने के लिए उपाध्यक्ष ने ‘स्थायी राहत कोष’ का सुझाव दिया है:
प्रारंभिक अंशदान: प्रत्येक पदाधिकारी द्वारा कम से कम ₹100 का प्रारंभिक योगदान।

*बहुआयामी उपयोग*: यह कोष न केवल आपातकाल के लिए होगा, बल्कि प्रशिक्षण सत्रों, जिला व मंडल स्तर की संगठनात्मक जरूरतों और पत्रकारों के कौशल विकास कार्यक्रमों के लिए भी उपयोग में लाया जाएगा।

*अनुभव और शक्ति का अनूठा संगम*
राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग की विशिष्टता यह है कि इसमें केवल पत्रकार ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, न्यायिक अधिकारी और समाज के प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं। श्री शर्मा के अनुसार, इन अनुभवी दिग्गजों की संवेदनशीलता और मार्गदर्शन इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर एक ‘मिसाल’ बनाने में सक्षम है।
*निष्कर्ष: भयमुक्त पत्रकारिता का नया युग*
यह प्रस्ताव केवल एक योजना नहीं, बल्कि पत्रकार समुदाय की गरिमा और उनके नैतिक अधिकारों का दस्तावेज है। जब पत्रकार को सुरक्षा और सम्मान का अहसास होगा, तभी वह भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय के खिलाफ बिना किसी भय के आवाज उठा सकेगा।
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