April 13, 2026

*नारी शक्ति का वंदन:’नयी दिशा परिवार’ द्वारा ‘कर्मयोगी महिला सम्मान’ समारोह का भव्य आयोजन*

*पुनः गौरव पाने की ओर अग्रसर नारी: डॉ. अनिल सुलभ ने याद दिलाया प्राचीन भारत का स्वर्णिम काल*

 

रविंद्र कुमार,संपादक/​पटना / 07 मार्च, 2026 :: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को राजधानी के हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था ‘नयी दिशा परिवार’ द्वारा ‘कर्मयोगी महिला सम्मान-सह-सांस्कृतिक समारोह’ का गरिमामय आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली प्रबुद्ध महिलाओं को सम्मानित किया गया और नारी सशक्तिकरण के विविध आयामों पर चर्चा की गई।

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*​न्यूज़ हाइलाइट्स*

 

*​मुख्य आयोजन: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में ‘कर्मयोगी महिला सम्मान’ वितरण।*

*​प्रमुख अतिथि: पटना की मेयर सीता साहू, डिप्टी मेयर रेशमी चंद्रवंशी और एसीजेएम अनुपमा त्रिपाठी समेत कई गणमान्य विभूतियाँ शामिल हुईं।*

*​मुख्य संदेश: सशक्तिकरण का अर्थ पुरुषों को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर एक बेहतर समाज बनाना है।*

*​सांस्कृतिक छटा: गीत-संगीत और नृत्य की प्रस्तुतियों ने समां बांधा।*

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*​सम्मान से नवाजी गईं समाज की धुरी*

समारोह के दौरान ‘नयी दिशा परिवार’ की ओर से पटना की प्रथम नागरिक सीता साहू (महापौर), रेशमी चंद्रवंशी (उप महापौर), और न्यायिक क्षेत्र से अनुपमा त्रिपाठी (एसीजेएम) को ‘कर्मयोगी महिला सम्मान’ से अलंकृत किया गया। इनके अतिरिक्त डॉ. किरण शरण, डॉ. मीना कुमारी परिहार ‘मान्या’, वार्ड पार्षदों और कला-साहित्य से जुड़ी लगभग दो दर्जन महिलाओं को उनकी कर्तव्यनिष्ठा के लिए सम्मानित किया गया।

*​वैचारिक विमर्श: पुरुष के विरोध में नहीं, साथ में है विकास*

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि *अनुपमा त्रिपाठी* ने अपने संबोधन में सशक्तिकरण की परिभाषा को स्पष्ट करते हुए कहा, “स्त्री और पुरुष एक-दूसरे के पूरक हैं। महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य पुरुषों को कमजोर करना नहीं, बल्कि आपसी आदर के साथ एक रहने योग्य समाज का निर्माण करना है।”

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​वहीं, सम्मेलन के अध्यक्ष *डॉ.अनिल सुलभ* ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य रखते हुए कहा कि प्राचीन काल में समाज नारी-सत्तात्मक था, जहाँ स्त्रियाँ वेदों की ऋचाओं की रचना करती थीं। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाओं को पुनः वही गौरवशाली स्थान प्राप्त करना होगा जो मध्यकाल की कुरीतियों के कारण खो गया था।

*​सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने जीता दिल*

सम्मान समारोह के पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर चला। कुमार पंकज सिन्हा और राजा बाबू के सुरीले गायन ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं लक्ष्मी कुमारी, प्रियांशी और अदिति मौर्या के नृत्य प्रदर्शन को दर्शकों की खूब सराहना मिली। संस्था के सचिव राजेश राज और संरक्षक मंडल ने कार्यक्रम के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
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