*संसद में गूँजी ‘सामाजिक न्याय’ की हुंकार: राजद सांसद संजय यादव का सरकार पर तीखा हमला; कहा— “OBC मतलब सिर्फ Only Bhashan Content”*

रविन्द्र कुमार, संपादक /पटना /नई दिल्ली /04 फरवरी, 2026 :: संसद के बजट सत्र के दौरान राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का विरोध करते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद संजय यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। उन्होंने ‘सामाजिक न्याय’ के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि आज के भारत में एक नई राजनीति चल रही है, जिसका “नाम सामाजिक न्याय है, लेकिन काम सामाजिक अन्याय है।”
*भाषणों में OBC, पर निर्णयों से गायब*
संजय यादव ने सरकार की कथनी और करनी पर सवाल उठाते हुए एक नया नारा उछाला। उन्होंने कहा कि इस सरकार के लिए OBC का अर्थ केवल “Only Bhashan Content” बनकर रह गया है।
”पोस्टर में OBC है, प्रचार में OBC है, लेकिन जब बात नीति, नियुक्ति और निर्णय की आती है, तो वहाँ से OBC पूरी तरह गायब है। सरकार की नीति और व्यवहार में जमीन-आसमान का फर्क है।”

*आंकड़ों के जरिए घेरा: 9 लाख नौकरियों और 7% बैकलॉग का मुद्दा*
सांसद ने सदन में आंकड़ों को रखते हुए सरकार से तीखे सवाल पूछे:
**आबादी बनाम हक: देश में ओबीसी की आबादी लगभग 60% है, लेकिन सचिवालय, आयोगों और विश्वविद्यालयों के निर्णायक पदों पर उनकी भागीदारी नगण्य है।

**नौकरियों की लूट: ओबीसी वर्ग के हक की 9 लाख से अधिक नौकरियां उन्हें नहीं दी गईं।
**मंडल कमीशन का अपमान: मंडल आयोग लागू हुए 36 साल बीत गए, फिर भी आरक्षित कोटे की 7% रिक्तियां आज भी खाली हैं। आखिर वे कौन लोग हैं जो ओबीसी युवाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर रहे हैं?

*’NFS’ (Not Found Suitable) पर कड़ा प्रहार*
संजय यादव ने उच्च शिक्षण संस्थानों में ओबीसी/एससी/एसटी उम्मीदवारों को NFS (Not Found Suitable) घोषित किए जाने की प्रवृत्ति पर आक्रोश व्यक्त किया।
**उन्होंने कहा कि UGC के आंकड़े बताते हैं कि जाति-आधारित भेदभाव में 118.4% की बढ़ोतरी हुई है।
**उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या इस देश के हर दूसरे व्यक्ति में सरकार को कोई काबिल और उपयुक्त व्यक्ति नहीं मिलता? जो लोग पिछड़ों को ‘अयोग्य’ करार देते हैं, उनके संकीर्ण और नकारात्मक मानसिक बोध की जांच होनी चाहिए।”

*”हम हक मांगें तो जातिवादी, आप नफरत फैलाएं तो राष्ट्रवादी”*
सांसद ने न्यायिक हस्तक्षेपों पर भी टिप्पणी की और कहा कि आरक्षण को कमजोर करने में इनकी बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने अंत में एक भावनात्मक प्रहार करते हुए कहा कि जब हम पिछड़ों, दलितों और जरूरतमंदों की बात करते हैं, तो हमें ‘जातिवादी’ और ‘जंगलराज’ वाला कहा जाता है। लेकिन जब सत्ता पक्ष इंसान को इंसान से लड़ाता है और नफरत फैलाता है, तो उसे ‘राष्ट्रवादी’ और ‘मंगलराज’ का नाम दिया जाता है।
संजय यादव के इस भाषण ने संसद में सामाजिक न्याय की बहस को एक नई दिशा दे दी है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
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