February 11, 2026

*दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी का निधन: माया श्रीवास्तव ने भारत रत्न देने की मांग की*

रविंद्र कुमार, संपादक/पटना, 23 जनवरी 2026 :: मिथिला की सांस्कृतिक धरोहर और राष्ट्रसेवा की प्रतीक महारानी अधिरानी कामसुंदरी देवी साहिबा का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दरभंगा महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी पत्नी रहीं महारानी को जीते जी भारत रत्न न मिलने पर केंद्र सरकार से मरणोपरांत सम्मान देने की मांग उठी है।

समर्थ नारी समर्थ भारत की राष्ट्रीय सह-संयोजिका और कायस्थ महासभा की प्रदेश महामंत्री *माया श्रीवास्तव* ने इसे राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बताया।

******राष्ट्रसेवा का स्वर्णिम अध्याय******

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान आर्थिक संकट में महारानी ने 600 किलो सोना, 90 एकड़ जमीन, करोड़ों रुपये दान दिए। उन्होंने अपना निजी हवाई अड्डा (दरभंगा एयरपोर्ट) और तीन विमान राष्ट्र रक्षा के लिए समर्पित कर दिए। शिक्षा और परोपकार में भी योगदान उल्लेखनीय—कल्याणी फाउंडेशन, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल के लिए जमीन दान की।

महाराजा के निधन (1962) के बाद संपत्ति-ट्रस्ट विवादों का सामना किया, फिर भी सादगी और गरिमा बनाए रखी।माया श्रीवास्तव ने कहा, “कामसुंदरी देवी सिर्फ महारानी नहीं, मिथिला की संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रसेवा की प्रतीक थीं। 10 वर्ष की आयु में महामहिम बनीं, फिर भी न तोपों की सलामी मिली।”

*****संगठनों की एकस声音 मांग******

मधुबनी जिला अध्यक्ष साधना अरुणकरण ने बताया, “2020 में उनसे मिलीं—उनकी उदारता अविस्मरणीय।”

प्रदेश अध्यक्ष पुष्पा पाठक, जिला अध्यक्ष साधना अरुणकरण, कामिनी कारण, वीना मलिक, ऋतु दास, निरु सिंह, सरिता सिंह आदि ने शोक व्यक्त कर कहा, “न नितीश कुमार, न नीतीश, न पीएम मोदी या सितारे श्रद्धांजलि न दिए।

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नाच-गाने वालों को सम्मान मिलता है, महारानी को क्यों नहीं?”कायस्थ समाज के चित्रांश परिवार पर भी सवाल: “अपनों के लिए आवाज क्यों नहीं?” दरभंगा राज दुनिया की सबसे बड़ी रियासतों में था—उनके उपकार शब्दों से परे।

******ऐतिहासिक पृष्ठभूमि*******

महारानी का जन्म 1930 में हुआ। 1940 में बाल-विवाह से राजमहल आईं। महाराजा के निधन के बाद ट्रस्ट विवादों में फंसीं, लेकिन शिक्षा-स्वास्थ्य क्षेत्र में सक्रिय रहीं। बिहार सरकार ने अभी तक कोई राजकीय सम्मान घोषित नहीं किया।

मांग है कि उनकी त्याग-भावना को भारत रत्न से नवाजा जाए, जैसे अन्य राष्ट्रनायकों को मिला। मिथिला में शोक की लहर। शत शत नमन।

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रविन्द्र कुमार
रविन्द्र कुमार
प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
मो .9304238302

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