परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम जी का महानिर्वाण दिवस श्रद्धाभाव से मनाया गया। इस अवसर पर वाराणसी के पड़ाव क्षेत्र के गंगा तट पर विशेष पूजा-अर्चना, कलश यात्रा और हवन का आयोजन हुआ।
डॉ संजय रघुवर ने कहा कि स्वास्थ्य ठीक नहीं रहने के कारण पड़ाव वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के गंगा तट किनारे के किनारे महासमाधि स्थल पर नहीं जा सका घर पर ही रहकर उनके तैलचित्र पर माल्यार्पण कर एक दिन और एक रात के लिए अखंड ज्योति प्रज्वलित कर गुरुगीता, सफल योनि का पाठ कर हवन करने करके अपनी श्रद्धा अर्पित की।

आगे उन्होंने कहा कि मुझे आज भी याद है कि वर्ष 1992 के नवंबर महीना में गोह अंचल के हथियारा गांव में अपने समाजवादी मित्र स्वर्गीय गयानंद शर्मा के यहां एक वैवाहिक कार्यक्रम में भाग लेने गया था तो हथियारा प्रवास के दौरान ही स्वप्न में उनके दर्शन हुए थे और स्वप्न में ही उन्होंने कहा था कि अपना शरीर त्याग दिया है और उनकी स्मृति में बारुण सोन नद के किनारे उनके छोटे से आश्रम में भंडारा होगा जिसमें मुझे शामिल होना है और प्रसाद तैयार करने के वास्ते सुखा लकड़ी का प्रबंध कर देना है।

उक्त स्वप्न के बाद मेरी नींद टूट गई और स्वप्न के बारे में चिंतन करने लगा क्योंकि उनके द्वारा स्थापित संस्था श्री सर्वेश्वरी समूह से अब तक हमारे कोई संबंध नहीं थे जब दूसरे दिन देवकुंड होकर घर आया तो समाचार पत्रों से जानकारी मिली थी अघोरेश्वर भगवान राम जी ने विदेश में ही अपना शरीर छोड़ दिया है और उनका पार्थिव शरीर भारत लाया जा रहा है।

उन दिनों मुझे किसी कार्यवश बाहर जाना था पर अचानक बारूण चला गया उन दिनों बारुण में हमारे रिश्तेदार थाना प्रभारी थे बरुण जाने के पश्चात सोन नदी के किनारे मेरे कदम औघड़ आश्रम श्री सर्वेश्वरी समूह की ओर बढ़ गए तथा आश्रम जाने पर आश्रम के कार्यकर्ताओं ने बताया कि थाना के समिप ही नबीनगर जाने वाली3 सड़क के किनारे एक सूखा पेड़ है यदि उसमें से लकड़ी काटने का प्रबंध हो जाए तो अच्छा रहेगा मैं पुलिस के सहायता से आवश्यकता अनुसार लकड़ी का प्रबंध कराया और स्वयं भंडारा में मौजूद रहा।
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परम पूज्य अघोरेश्वर की एक मुङिया शिष्य पीतांबरी जी थे जो अध्यात्म और शास्त्रों के प्रखंड विद्वान थे उनका हमसे संपर्क बना और इनसे मैंने प्रारंभिक प्रशिक्षण पाया तथा पूज्य अघोरेश्वर के शिष्य परमपूज्य औघड़ मंगल राम बाबा जी (डाल्टेनगंज) से विधिवत अघोर परंपरा में दीक्षा लिया.

मुझे कई अवसरों पर पूज्य अघोरेश्वर के स्वप्न में दर्शन होते रहे हैं और उनका मार्गदर्शन मिलता रहा है मेरा दुर्भाग्य रहा कि हममे कई विकृतियों रहीं जिससे मैं अपने आपसे अलग नहीं कर पाया ।
परम पूज्य अघोरेश्वर ने श्री सर्वेश्वरी समूह के माध्यम से अघोर परंपरा को जन जन तक पहुंचा और जनमानस में फैली भ्रांति को दूर करके इसे मानव सेवा से जोड़ा
अघोरेश्वर ने सांप्रदायिकता जातीयता एवं अंधविश्वास तथा पुरोहित वाद पर प्रहार किया अंत में मैं उनको चरण कमल में पुनः श्रद्धा सुमन अर्पित करता हूं। 
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प्रधान सम्पादक -(www.biharnews18.in)
मो .9304238302
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