*मानसिक स्वास्थ्य संकट मानवता के लिए खतरा : सोनू त्यागी ने चेताया, ‘गो स्पिरिचुअल’ ने की नई पहल की घोषणा*
**नई दिल्ली, 31 अक्टूबर 2025**:: गो स्पिरिचुअल और अप्रोच एंटरटेनमेंट के संस्थापक सोनू त्यागी ने वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य संकट को मानवता के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए गंभीर चिंता जताई है।
हाल की भयावह घटनाओं—मुंबई के पवई होस्टेज कांड, बेंगलुरु में सात वर्षीय बच्ची की हत्या, सड़क विवाद में डिलीवरी एजेंट की कुचलकर हत्या, और इंदौर के राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर—को वे समाज में गहराते मानसिक असंतुलन की चेतावनी मानते हैं। त्यागी ने कहा, “ये घटनाएं संयोग नहीं, बल्कि एक टूटते समाज का आईना हैं। अगर अभी कदम न उठाए, तो आने वाले दशक निराशा और हिंसा के अंधेरे में डूब जाएंगे।”

त्यागी ने मुंबई कांड का जिक्र करते हुए बताया कि आर्थिक तनाव में फंसे रोहित आर्य ने 17 बच्चों को बंधक बनाया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। बेंगलुरु हत्याकांड में ‘प्राइवेसी’ के नाम पर एक बच्ची की जान ली गई, जो संवेदना के लोप की मिसाल है। सड़क विवाद में दंपति द्वारा डिलीवरी एजेंट को कार से कुचलना छोटी झुंझलाहट को घातक हिंसा में बदलने का उदाहरण है। वहीं, रघुवंशी केस रिश्तों में छिपी अस्थिरता को उजागर करता है। “व्यक्तिगत निराशा पूरे समाज को खतरे में डाल रही है,” उन्होंने जोर दिया।

विश्व स्तर पर 280 मिलियन से ज्यादा लोग मानसिक विकारों से जूझ रहे हैं, जबकि भारत में हर सातवां व्यक्ति प्रभावित है। यहां प्रति लाख लोगों पर एक से कम मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं। 2025 में युवाओं में आत्महत्या की दर 15% बढ़ी, कार्यस्थलों पर मानसिक मामलों में दोगुनी वृद्धि हुई। सोशल मीडिया हीनभावना, गिग इकॉनॉमी थकान, एआई से नौकरी का डर, जलवायु संकट और डिजिटल एकाकीपन 2030 तक विकारों में 30% इजाफा कर सकते हैं। भारत में अनुपचारित बीमारियां सालाना 1.5 ट्रिलियन डॉलर की उत्पादकता नष्ट कर रही हैं।

हालांकि, त्यागी का संदेश आशा भरा है। “आध्यात्मिकता विज्ञान का पूरक है। ध्यान, आत्मचिंतन और सामुदायिक जुड़ाव से हम मजबूती हासिल कर सकते हैं।” उन्होंने मांग की कि मानसिक स्वास्थ्य को सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा में शामिल किया जाए, न्यूरो-स्पिरिचुअल रिसर्च बढ़े, कार्यस्थलों पर ‘मेंटल सब्बाथ’ अनिवार्य हो, और शिक्षा में भावनात्मक बुद्धिमत्ता जोड़ी जाए।

गो स्पिरिचुअल इस दिशा में सक्रिय है। 2026 में ‘गो माइंडफुल’ अभियान शुरू होगा, जो देशभर में मुफ्त वर्कशॉप्स आयोजित करेगा—तनाव प्रबंधन, भावनात्मक मजबूती और संकट सहायता पर फोकस। ‘गो ह्यूमन सर्कल्स’ कार्यक्रम सहानुभूति और क्षमा पर संवाद चलाएगा, स्कूलों-कॉर्पोरेट्स के साथ साझेदारी में। संगठन की न्यूज मैगजीन और ऐप पर एआई-पावर्ड मूड ट्रैकर्स, सर्वाइवर स्टोरीज और एक्सपर्ट कॉलम्स से कलंक मिटाने की कोशिश होगी।

सोनू त्यागी की यह पहल मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता को नई ऊंचाई दे सकती है, खासकर युवाओं और परिवारों के बीच।

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