*विपक्ष द्वारा SIR का विरोध किया जाना केवल एक राजनीतिक स्टंट है : राजीव रंजन प्रसाद*

रविंद्र कुमार,संपादक/पटना /13 अगस्त 2025 :: सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर पर सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी की– “चुनाव आयोग का यह कहना सही है कि आधार को नागरिकता के निर्णायक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसे सत्यापित किया जाना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर पर दिए गए इस टिप्पणी के बाद जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा । उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एसआईआर को लेकर दी गई टिप्पणी केवल इसकी कानूनी वैधता की पुष्टि नहीं है , बल्कि यह जनता के विश्वास की भी पुष्टि है ।

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि एसआईआर की प्रक्रिया संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप है । चुनाव आयोग को इसका अधिकार है और इसमें कोई पक्षपात या भेदभाव नहीं हो रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार और वोटर कार्ड को नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं माना जा सकता ।

जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने साबित कर दिया कि चुनाव आयोग द्वारा अपनाई गई सुधार की राह सही है और विपक्ष का विरोध केवल एक राजनीतिक स्टंट है ।

उन्होंने कहा कि दरअसल आज का विपक्ष दिशाहीन , भ्रमित और हताश है । बिहार में हो रहे एसआईआर का विरोध करने , वोट चोरी के आरोप लगाने , संसद में बहस से भागने और सड़क पर मार्च निकालने का कोई औचित्य नहीं है । यह वही विपक्ष है जिसने तीन साल पहले आधार कार्ड को वोट से जोड़ने का विरोध किया था और अब वही आधार को नागरिकता का प्रमाणपत्र मानने की मांग कर रहा है ।

श्री प्रसाद ने कहा कि जब संसद का मानसून सत्र चल रहा है , तब विपक्ष को अपनी बात संसद में रखनी चाहिए थी । लेकिन उसने सड़क पर नाटक करने का चुनाव किया । यह वही राजनीतिक संस्कृति है , जो अतीत में बूथ लूट को संस्थागत बनाने और बाहुबलियों को संरक्षण देकर चुनाव जीतने के लिए जानी जाती रही है ।
यदि चुनाव आयोग फर्जी वोटिंग रोकने के लिए कदम उठा रहा है , तो यह लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा और आवश्यक कदम है । आज कांग्रेस और राजद जैसे परिवारवादी दलों को लोकतंत्र की नहीं , बल्कि सत्ता से दूर होने की चिंता है । यही कारण है कि वे संवैधानिक संस्थाओं पर हमला , भ्रामक बयानबाज़ी और अराजकता का सहारा ले रहे हैं ।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी राजनीतिक दल को एसआईआर की प्रक्रिया में गड़बड़ी लगती है , तो अब तक किसी ने चुनाव आयोग के पास सुधार के लिए आवेदन क्यों नहीं दिया या कोई ठोस सबूत क्यों नहीं पेश किया ? जबकि आयोग ने इसके लिए एक अगस्त से एक सितंबर तक का समय पहले ही निर्धारित किया है । विपक्षी गठबंधन को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टता के बाद विपक्ष सड़क पर नाटक करने की बजाय संसद में अपनी बात रखे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करे ।
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