*पटना में साहित्य का महाकुंभ: महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री और पं. शिवदत्त मिश्र की जयंती पर उमड़ा कवियों का सैलाब*

विजय सिंह /पटना | 05 फरवरी, 2026 :: बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन के प्रांगण में गुरुवार को गीतों के राजकुमार महाकवि आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री और मनीषी चिंतक पं. शिवदत्त मिश्र की जयंती ‘गीतांजलि’ के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर साहित्यकारों ने शास्त्री जी को ‘गीत-साहित्य का प्राण’ बताते हुए उन्हें राष्ट्रकवि दिनकर और गोपाल सिंह नेपाली की श्रेणी का शलाका-पुरुष करार दिया।

*शास्त्री जी: कोकिल-कंठ और गीतों के सूर्य*
समारोह की अध्यक्षता करते हुए सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने शास्त्री जी के विराट व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा:
”शास्त्री जी संस्कृत के प्रकांड विद्वान थे, जिन्होंने महाप्राण निराला के परामर्श पर हिन्दी में सृजन शुरू किया और देखते ही देखते गीत-संसार के सूर्य बन गए। जब वे अपने कोकिल-कंठ से स्वर देते थे, तो हजारों धड़कनें थम जाती थीं।”

डॉ. सुलभ ने शास्त्री जी की बहुमुखी प्रतिभा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने कविता के अलावा उपन्यास, नाटक और संस्मरणों में भी कालजयी रचनाएं दीं।
*पं. शिवदत्त मिश्र: दार्शनिक चेतना के प्रणेता*
सम्मेलन के पूर्व उपाध्यक्ष पं. शिवदत्त मिश्र को याद करते हुए वक्ताओं ने उन्हें एक ‘मानवतावादी दार्शनिक’ बताया। डॉ. सुलभ ने कहा कि उनके ग्रंथ ‘कैवल्य’ में आध्यात्मिक चिंतन की पराकाष्ठा दिखती है। साहित्य सम्मेलन के पुनरुद्धार आंदोलन में उनकी भूमिका अविस्मरणीय रही।

*सम्मान और अलंकरण*
साहित्यिक सेवा के लिए इस गौरवशाली अवसर पर दो युवा हिन्दी सेवियों—विजय ज्योति और जय प्रकाश पाण्डेय को ‘महाकवि जानकी वल्लभ शास्त्री स्मृति-सम्मान’ से अलंकृत किया गया।
*कवि-सम्मेलन: ग़ज़लों और गीतों से गूंजा सभागार*
समारोह के दूसरे सत्र में आयोजित कवि-सम्मेलन की शुरुआत चंदा मिश्र की वाणी-वंदना से हुई।

**मृत्युंजय मिश्र ‘करुणेश’: उन्होंने अपनी प्रसिद्ध ग़ज़ल “बहुत दिन से दिल को रुलाया नहीं है/ जमाना हुआ ज़ख्म खाया नहीं है” पढ़कर समां बांध दिया और शास्त्री जी की जयंती को ‘कवि-दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव रखा।

**डॉ. रत्नेश्वर सिंह: “धरती से अम्बर की कितनी दूरी है/ तन से इस मन की कितनी दूरी है” जैसे विरह प्रधान गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया।
*प्रबुद्धजनों की उपस्थिति*
कार्यक्रम में डॉ. मधु वर्मा, पूर्व आईएएस बच्चा ठाकुर, डॉ. पुष्पा जमुआर, विभा रानी श्रीवास्तव और डॉ. पूनम आनंद सहित दर्जनों कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रद्धांजलि दी। मंच का सफल संचालन ब्रह्मानन्द पाण्डेय ने और धन्यवाद ज्ञापन कृष्ण रंजन सिंह ने किया।

*प्रमुख बिन्दु एक नज़र में*
**महाकवि शास्त्री की तुलना: दिनकर और नेपाली के समकक्ष मंचीय जादूगर।
**साहित्यिक योगदान: संस्कृत से हिन्दी तक का सफर और ‘सेंटर ऑफ अट्रैक्शन’ रहे गीत।

**स्मृति सम्मान: जय प्रकाश पाण्डेय और विजय ज्योति को मिला सम्मान।
**विशेष मांग: शास्त्री जी की जयंती को ‘कवि-दिवस’ घोषित करने की वकालत।
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