*ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस का पंचम स्थापना दिवस: राजनीतिक सशक्तिकरण और वैश्विक एकजुटता का शंखनाद*

*GKC लगातार कायस्थ एकता के लिए प्रयासरत – रागिनी रंजन*

रविंद्र कुमार,संपादक/पटना / 02 फ़रवरी 2026 :: रविवार 01 फरवरी को दुनिया भर के कायस्थों को एक साझा मंच पर लाने के संकल्प के साथ ग्लोबल कायस्थ कॉन्फ्रेंस (GKC) ने अपना पांचवां स्थापना दिवस पटना के ‘रॉयल गार्डन’ में अत्यंत भव्यता के साथ मनाया। 
इस GKC के पांचवां स्थापना दिवस पटना के अलावे विभिन्न राज्यो से भी आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जहाँ कायस्थ समाज की राजनीतिक उपेक्षा को समाप्त करने और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए नई रणनीति तैयार की गई।

*हाशिए से मुख्यधारा तक: राजीव रंजन प्रसाद का आह्वान*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता और GKC के ग्लोबल अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने समाज की राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की। श्री राजीव रंजन पटना में आयोजित ग्लोबल कायस्थ कांफ्रेस के पांचवें स्थापना दिवस पर बिहार और बिहार के बाहर से आए कायस्थों को संबोधित करते हुये दो टूक में कहा:

*”आज कायस्थ समाज बिखराव के कारण राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है और हाशिए पर धकेल दिया गया है। अब समय आ गया है कि हम एकजुट होकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करें और राजनीतिक दलों को अपनी अपरिहार्यता का अहसास कराएं।”*
उन्होंने युवाओं को ‘नौकरी मानसिकता’ से बाहर निकलने की सलाह देते हुए व्यवसाय, राजनीति और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में नेतृत्व करने के लिए प्रेरित किया।

*वैश्विक एकता का बढ़ता प्रभाव: रागिनी रंजन*
जीकेसी की प्रधान न्यासी रागिनी रंजन ने संगठन की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि कायस्थ एकता का प्रयास अब धरातल पर दिखने लगा है। उन्होंने कहा कि आज हजारों की संख्या में ‘जीकेसियन’ देश-विदेश में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं, जो एक सशक्त और संगठित समाज की पहचान है।

*’जीकेसियन’ केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक ग्लोबल हेल्प-डेस्क के रूप में स्थापित*
आज ‘जीकेसियन’ (GKCian) शब्द केवल एक पहचान नहीं, बल्कि एक ग्लोबल हेल्प-डेस्क बन चुका है। तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से बने इस सशक्त नेटवर्क के जरिए हजारों सदस्य शिक्षा, चिकित्सा, रोजगार और आकस्मिक संकट के समय एक-दूसरे के लिए ढाल बनकर खड़े होते हैं।

**वैश्विक विस्तार और उत्सव की गूँज**
जीकेसी का पंचम स्थापना दिवस केवल पटना की धरती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसकी गूँज सात समंदर पार तक भी सुनाई दी। भारत के विभिन्न राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और झारखंड—के साथ-साथ विदेशों में रह रहे प्रवासी कायस्थों ने भी अपनी जड़ों से जुड़कर इस उत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि भौगोलिक दूरियाँ अब समाज की वैचारिक एकता के आड़े नहीं आ सकतीं।

*उत्सव और सांस्कृतिक विरासत का संगम*
स्थापना दिवस का शुभारंभ संगठन के झंडोत्तोलन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस दौरान कई प्रतीकात्मक और सांस्कृतिक आयोजन हुए:
**प्रतीकात्मक शुरुआत: जीकेसी के लोगो युक्त बैलून हवा में उड़ाए गए और ‘कायस्थ एंथम’ के साथ समाज की सांस्कृतिक जड़ों को याद किया गया।
**धार्मिक अनुष्ठान: भगवान चित्रगुप्त की आरती और ‘जीकेसी दीपोत्सव’ ने कार्यक्रम में आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी।
**सांस्कृतिक प्रस्तुति: सांस्कृतिक प्रकोष्ठ के कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।

*सशक्त और संगठित समाज का विजन*
हजारों की संख्या में सक्रिय ये सदस्य यह सिद्ध कर रहे हैं कि कायस्थ समाज अब केवल अपनी बौद्धिक क्षमता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी सामूहिक सांगठनिक शक्ति के लिए भी जाना जाएगा। यह ‘मदद करने की संस्कृति’ ही एक ऐसे सशक्त समाज की नींव है, जो आने वाली पीढ़ी को एक सुरक्षित, समृद्ध और एकजुट भविष्य की गारंटी देता है।

*इन दिग्गजों ने भी साझा किए अपने महत्वपूर्ण विचार*
समारोह में ग्लोबल उपाध्यक्ष दीपक अभिषेक, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. नम्रता आनंद, राष्ट्रीय प्रवक्ता मुकेश महान और प्रदेश महासचिव संजय कुमार सिन्हा सहित कई वक्ताओं ने समाज के आर्थिक और सामाजिक उत्थान पर जोर दिया। कार्यक्रम में नीलेश रंजन, दीप श्रेष्ठ, शिवानी गौड़ और बीके सहाय जैसे गणमान्य लोग सक्रिय रूप से शामिल रहे।
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