*विश्व पटल पर मिथिला पेंटिंग की धूम: स्वरोजगार और महिला सशक्तिकरण का बना सशक्त माध्यम*
*’मिथिला पेंटिंग अब विश्व धरोहर’: माया श्रीवास्तव*

रविंद्र कुमार, संपादक /पटना/बेंगलुरु (सहजापूर)/25 जून 2026 :: कर्नाटक के बेंगलुरु स्थित सहजापूर में ‘वंडर वर्ल्ड सोसाइटीज’ के तत्वावधान में ‘समर्थ भारत’ संगठन द्वारा पाँच दिवसीय मधुबनी पेंटिंग शिक्षा शिविर एवं कार्यशाला का भव्य समापन हुआ। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को पारंपरिक लोक कला के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना था।
कार्यशाला की अध्यक्षता सीमा सक्सेना ने की, जबकि समापन अवसर पर धन्यवाद ज्ञापन आरती जायसवाल द्वारा प्रस्तुत किया गया।
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#न्यूज़हाईलाइट्स:
👍वैश्विक पहचान: मिथिला पेंटिंग का विश्व धरोहर के रूप में स्थापित होना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी बढ़ती मांग।
👍आर्थिक स्वावलंबन: सिलाई-कटाई और मधुबनी पेंटिंग के माध्यम से महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए द्वार।
👍टेक्सटाइल का समावेश: साड़ी, कुर्ती और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर पेंटिंग से उत्पादों का बाजार मूल्य बढ़ना।
👍विस्तार: ‘समर्थ भारत’ द्वारा कई जिलों में प्रशिक्षण केंद्र संचालित, शेष जिलों में शीघ्र विस्तार की योजना।
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*’मिथिला पेंटिंग अब विश्व धरोहर’ : माया श्रीवास्तव*

कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए ‘समर्थ भारत’ की राष्ट्रीय सह-संयोजिका और बिहार, झारखंड एवं पश्चिम बंगाल की प्रभारी माया श्रीवास्तव ने कहा, “मिथिला पेंटिंग ने आज विश्व स्तर पर अपनी एक विशिष्ट पहचान बना ली है। यह केवल एक कला नहीं, बल्कि आज आजीविका का एक सशक्त साधन बन चुकी है। देश-विदेश में इसकी बढ़ती मांग ने इसे आर्थिक मजबूती का एक प्रमुख आधार बना दिया है।”

श्रीमती श्रीवास्तव ने महिलाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे इस कला को अपनाकर अपने घर से ही स्वरोजगार की शुरुआत कर सकती हैं। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि जब मधुबनी पेंटिंग को टेक्सटाइल डिजाइन से जोड़ा जाता है, तो इसके परिणाम अत्यधिक लाभकारी होते हैं। उन्होंने प्रशिक्षित महिलाओं को सलाह दी कि वे साड़ियों, कुर्तियों, दुपट्टों, पूजा की थालियों, कुशन कवर और बांस की वस्तुओं पर पेंटिंग कर उन्हें बाजार में उच्च मूल्य पर बेच सकती हैं।

👍*आत्मनिर्भरता का नया आयाम*
’समर्थ नारी-समर्थ भारत’ अभियान के तहत महिलाओं को बुटीक, सिलाई-कटाई और पेंटिंग केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सीमा सक्सेना ने मिथिला पेंटिंग को आज के युग की सर्वश्रेष्ठ कला बताते हुए कहा कि यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर है जिसे सहेजने और आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

इस प्रशिक्षण शिविर में शशि बत्रा, सुधा रानी, उषा चौरसिया, नीशू राय, मीना श्रीबातरी, नीलम रानी, उमा बिहारी, गिन्नी ठाकुर, झूमा देवी, मीना देवी, रोमिता, संगीता, विमला लाल, संध्या शर्मा, सोनी गुमला, अनु प्रिया, संध्या गुप्ता, रश्मि मिश्रा, लक्ष्मी कुमारी, निर्मला जौहरी, अंजलि, कोकिला रॉय, मधु सेन और मधु मित्रा सहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं।
🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹

मिथिला पेंटिंग का यह आयोजन केवल कला का प्रशिक्षण नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी महिलाओं को आर्थिक आजादी की मुख्यधारा से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास है। जब पारंपरिक लोक कला को आधुनिक डिजाइनिंग और बाजार की आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाता है, तो वह ‘वोकल फॉर लोकल’ के विजन को साकार करता है। ‘समर्थ भारत’ का यह मॉडल अन्य संगठनों के लिए भी प्रेरणादायी है, क्योंकि यह महिलाओं को न केवल हुनर सिखा रहा है, बल्कि उन्हें एक सफल उद्यमी बनने के लिए जरूरी आत्मविश्वास भी प्रदान कर रहा है। आने वाले समय में ऐसी पहल ही देश की आर्थिक प्रगति में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगी।
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