*हनुमान जयंती विशेष: भारत का वह इकलौता मंदिर, जहां पत्नी ‘सुवर्चला’ के साथ पूजे जाते हैं बजरंगबली*

सुनील श्रीमाली/हैदराबाद/खम्मम/02 अप्रैल 2026 :: आज देशभर में हनुमान जयंती का पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जहां एक ओर भक्त संकटमोचन के ‘बाल ब्रह्मचारी’ रूप की पूजा कर रहे हैं, वहीं तेलंगाना के खम्मम जिले से एक ऐसी जानकारी सामने आ रही है जो अचंभित करने वाली है। क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा भी धाम है, जहां हनुमान जी अकेले नहीं बल्कि अपनी पत्नी देवी सुवर्चला के साथ विराजमान हैं?
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*न्यूज हाइलाइट्स (News Highlights)*
*अनोखी परंपरा*: तेलंगाना के एलंदु गांव स्थित ‘श्री सुवर्चला सहिता हनुमान मंदिर’ में होती है युगल रूप में पूजा।
*एकमात्र मंदिर*: पुजारियों का दावा- पूरे भारत में यह अकेला मंदिर है जहां हनुमान जी गृहस्थ रूप में पूजे जाते हैं।

*विशेष मान्यता*: शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि की प्राप्ति के लिए यहां उमड़ता है श्रद्धालुओं का सैलाब।
*पौराणिक आधार*: सूर्य देव की पुत्री सुवर्चला से विवाह के बाद ही हनुमान जी को प्राप्त हुई थीं शेष चार गुप्त विद्याएं।
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*आखिर क्यों करना पड़ा हनुमान जी को विवाह?*
धार्मिक ग्रंथों में हनुमान जी को आजीवन ब्रह्मचारी बताया गया है, किंतु तेलंगाना के खम्मम जिले में स्थित यह मंदिर एक विशेष पौराणिक कथा का साक्षी है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, जब हनुमान जी ने सूर्य देव को अपना गुरु मानकर उनसे नौ प्रकार की विद्याएं सीखने का आग्रह किया, तब एक धर्मसंकट उत्पन्न हो गया।

*शिक्षा की अनिवार्य शर्त*
सूर्य देव के पास कुल नौ विद्याएं थीं, जिनमें से पांच हनुमान जी ने अल्प समय में ही सीख लीं। शेष चार विद्याओं के लिए सूर्य देव ने शर्त रखी कि ये केवल ‘विवाहित’ व्यक्ति को ही सिखाई जा सकती हैं। चूंकि हनुमान जी बाल ब्रह्मचारी थे, अतः उन्होंने असमंजस व्यक्त किया।

*गुरु की आज्ञा और दिव्य विवाह*
शिष्य की व्याकुलता देख सूर्य देव ने अपनी पुत्री सुवर्चला के साथ विवाह का प्रस्ताव दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विवाह केवल शास्त्र मर्यादा की पूर्ति के लिए है और इससे हनुमान जी का ब्रह्मचर्य खंडित नहीं होगा। सुवर्चला स्वयं एक महान तपस्विनी थीं। सूर्य देव की आज्ञा मानकर हनुमान जी ने विवाह किया और इसके पश्चात उन्होंने शेष चार विद्याओं का पूर्ण ज्ञान प्राप्त किया।
*भक्तों की आस्था का केंद्र*
आज हनुमान जयंती के अवसर पर एलंदु गांव के इस मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जा रहे हैं। यहां आने वाले भक्तों का मानना है कि हनुमान जी के ‘सुवर्चला सहिता’ रूप के दर्शन करने से वैवाहिक बाधाएं दूर होती हैं और विशेष रूप से छात्रों को शिक्षा के क्षेत्र में अपार सफलता प्राप्त होती है।
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