*भारत की ऊर्जा सुरक्षा—बढ़ती मांग, वैश्विक चुनौतियां और आत्मनिर्भरता का नया रोडमैप*

जितेंद्र कुमार सिंहा /पटना /17 मार्च, 2026 :: आधुनिक विश्व की अर्थव्यवस्था का इंजन ‘ऊर्जा’ है। भारत जैसी उभरती महाशक्ति के लिए ऊर्जा केवल एक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। बढ़ती आबादी और तेजी से होते शहरीकरण के बीच भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कमजोरी ‘आयात पर निर्भरता’ है।
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*न्यूज़ हाइलाइट्स (News Highlights)*
*आयात पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल विदेशी बाजारों से खरीदता है।*
*रणनीतिक बदलाव: मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए भारत अब रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ा रहा है।*
*आपातकालीन सुरक्षा: विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR) तैयार किए गए हैं।*
*भविष्य का लक्ष्य: पेट्रोलियम पर निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर विशेष जोर।*

*ऊर्जा कूटनीति: संकट के समय में बदला रुख*
मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक अस्थिरता और युद्ध की स्थितियों ने हमेशा भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए जोखिम पैदा किया है। दुनिया का 48% तेल भंडार इसी क्षेत्र में होने के कारण यहाँ का तनाव वैश्विक कीमतों में उछाल लाता है। इस जोखिम को कम करने के लिए भारत ने अपनी ‘ऊर्जा कूटनीति’ को धार दी है। हाल के वर्षों में, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदकर न केवल अपना आयात बिल घटाया, बल्कि अपनी आपूर्ति को भी सुरक्षित किया।

*घरेलू सुरक्षा और रणनीतिक भंडार*
किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में देश की रफ्तार न थमे, इसके लिए भारत ने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) का निर्माण किया है। विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पाडुर स्थित ये भंडार आपातकालीन समय में लाइफलाइन का काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन भंडारों की क्षमता का विस्तार करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

*नवीकरणीय ऊर्जा: दीर्घकालिक समाधान*
ऊर्जा सुरक्षा का स्थायी समाधान जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से हटकर नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने में है। भारत इस समय सौर ऊर्जा उत्पादन में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है। राजस्थान और गुजरात के विशाल सौर पार्कों के साथ-साथ केंद्र सरकार की FAME योजना इलेक्ट्रिक वाहनों के नेटवर्क को मजबूत कर रही है, जिससे भविष्य में डीजल-पेट्रोल की मांग में बड़ी कमी आने की उम्मीद है।

ऊर्जा सुरक्षा अब केवल आर्थिक विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय संप्रभुता का मामला है। भारत के सामने चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन आयात स्रोतों के विविधीकरण (Diversification) और स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ते कदमों ने दुनिया को यह संकेत दे दिया है कि भारत ऊर्जा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ होने की ओर अग्रसर है।
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