*विश्व हिंदी दिवस पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन में समारोह का आयोजन किया गया*

*16 हिंदी-सेवियों को ‘हिंदी-रत्न’ अलंकरण प्रदान किया गया*

पटना, 11 जनवरी 2026: बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने शनिवार को कहा कि विश्व में सबसे तेजी से बढ़ रही भाषा हिंदी है, जो बोलने-समझने वालों की संख्या से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी भाषा बन चुकी है। 150 से अधिक देशों के 200 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में इसकी पढ़ाई हो रही है और सवा अरब से अधिक लोग इसे पढ़, बोल व लिख सकते हैं।

विश्व हिंदी दिवस पर बिहार हिंदी साहित्य सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए उन्होंने हिंदी को संस्कृति की उन्नायक बताते हुए गर्व से इसका उपयोग करने का आह्वान किया।
*******मुख्य वक्ताओं के उद्गार*********
समारोह के मुख्य अतिथि व बिहार उपभोक्ता संरक्षण आयोग अध्यक्ष न्यायमूर्ति संजय कुमार ने वैश्विक स्तर पर हिंदी अध्यापन बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के लिए हिंदी को अपनाने की अपील की, ताकि यह विश्व भाषा बने।

सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. अनिल सुलभ ने हिंदी की वैज्ञानिकता, माधुर्य व बाजार मांग की सराहना की, लेकिन संविधान द्वारा 14 सितंबर 1949 को दिए गए स्थान से वंचित रहने पर दुख जताया। “चीन की मंदारिन की तरह राष्ट्रभाषा बनती तो हिंदी दुनिया की सबसे बड़ी भाषा होती,” उन्होंने कहा।

उपाध्यक्ष डॉ. शंकर प्रसाद, डॉ. मधु वर्मा, डॉ. रत्नेश्वर सिंह, डॉ. अशोक प्रियदर्शी, डॉ. मेहता नगेंद्र सिंह, विभा रानी श्रीवास्तव व रवि अटल ने भी विचार व्यक्त किए।
*****सम्मान व कवि गोष्ठी*********
16 हिंदी-सेवियों को ‘हिंदी-रत्न’ अलंकरण प्रदान किया गया, जिनमें बनारस की सुनीता जौहरी, देवरिया के डॉ. जनार्दन प्रसाद सिंह, डॉ. सुलोचना कुमारी, डॉ. वीणा अमृत, डॉ. अनुराग शर्मा, राजेंद्र कुमार मंडल, गार्गी राय, प्रवीण कुमार श्रीवास्तव, सीमा रानी, डॉ. अर्पणा, अपराजिता रंजना, अनुभा गुप्ता, डॉ. भागवत कुमार, ऋचा रंजन, डॉ. स्मृति आनंद, इंद्रदेव प्रसाद व आस्था दीपाली शामिल हैं।

कवि सम्मेलन चंदा मिश्र की वाणी वंदना से शुरू हुआ। वरिष्ठ कवि श्याम बिहारी प्रभाकर, डॉ. सुधा सिन्हा, डॉ. आरती कुमारी, प्रो. सुनील कुमार उपाध्याय, डॉ. विद्या चौधरी, इंदु उपाध्याय, अनिता मिश्र सिद्धि, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, ई. अशोक कुमार, डॉ. मनोज गोवर्धनपुरी, बांके बिहारी साव, सागरिका राय, डॉ. सुमेधा पाठक, पंकज प्रियम, अरुण कुमार श्रीवास्तव, सुनीता रंजन, अर्जुन कुमार गुप्त, अरविंद अकेला, सूर्य प्रकाश उपाध्याय, संजय लाल चौधरी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. आर. प्रवेश, प्रेमलता सिंह राजपूत, डॉ. पंकज कुमार सिंह, विशाल कुमार वैभव व अश्विनी कुमार ने रचनाएं सुनाईं। मंच संचालन कवि ब्रह्मानंद पांडेय ने किया तथा धन्यवाद कृष्ण रंजन सिंह ने दिया।

इंदु भूषण सहाय, प्रवीर कुमार पंकज, नीता सिन्हा, संजीव कर्ण, रवि भूषण प्रसाद वर्मा, अर्जुन चौधरी, स्मृति आनंद, रोहिणी पति सिंह, डॉ. अलका कुमारी, सदानंद प्रसाद, डॉ. राकेश दत्त मिश्र, अर्णव राय सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।
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