*केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने फ़िल्म ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म सम्मान देने के फैसले की भी तीखी आलोचना की थी*

रविंद्र कुमार, संपादक/ नई दिल्ली 2 अगस्त 2025 :: फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की, जिसे बेस्ट डायरेक्शन व सिनेमैटोग्राफी कैटेगरी में नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. इसी फैसले ने केरल की राजनीति में हलचल मचा दी है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म का सम्मान दिया जाना नागवार गुजरा और
‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म सम्मान देने के फैसले की भी तीखी आलोचना भी कर दी थी।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शनिवार को कहा कि ‘द केरल स्टोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार देना फिल्मों का दुरुपयोग कर सांप्रदायिक नफरत फैलाने के प्रयासों का समर्थन करने जैसा है।
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के इस बयान पर विहिप का राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ (#thekeralastory) को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया जाना देश की उन सभी प्रतिभाओं का सम्मान है जिन्होंने ना सिर्फ इस्लामिक जिहादी तत्वों द्वारा फैलाए गए #लव_जिहाद की सच्चाई सम्पूर्ण विश्व को बताई अपितु, करोड़ों बेटियों व उनके परिजनों को उस विभीषिका से सावधान रहने का बेहद आवश्यक संदेश भी दिया।

कल शुक्रवार को 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में फिल्म के निर्देशक श्री सुदीप्तो सेन को बेस्ट डायरेक्टर और श्री प्रशांतनु मोहपात्रा को बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार मिला।
हालांकि, इस निर्णय ने केरल के कम्युनिस्ट मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की नींद हराम कर दी है क्योंकि लगता है कि केरल के जिहादियों से उनका गहरा नाता है।

उन्हें हजारों की संख्या में राज्य की बेटियों के लापता होने, उन्हें #लवजिहाद में फांस कर आतंकी बनाने या मौत के मुँह में धकेलने का दुःख नहीं है किंतु ऐसी वीभत्स घटनाओं को बड़े पर्दे पर लाकर समाज को सचेत करना उनको ‘भारतीय सिनेमा की महान परंपरा’ का अपमान दिख रहा है।
उन्हें तब राज्य की महान परंपरा के अपमान का तनिक भी भान नहीं हुआ जब नारी द्रोही व धर्मांतरणकारी लव जिहादी गैंग ने देश की, खास कर एक महान राज्य की, बेटियों को जिहादियों ने अपने चंगुल में धोखे या छल बल पूर्वक इस्लामिक स्टेट (ISIS) में शामिल होने के लिए मजबूर किया था। उनका शारीरिक, मानसिक व सामाजिक दोहन कर अनेक प्रकार की प्रताड़नाएं दी गईं। उन्हें उनके माता पिता व धर्म संस्कृति से अलग कर अधर्म व राष्ट्र द्रोह के मार्ग पर जबरन धकेला गया। 
मुख्यमंत्री विजयन को एक उत्तम कार्य की निंदा की बजाय अपनी जिहादी तुष्टिकरण की नीति छोड़ राज्य की जनता से अपनी अकर्मण्यता व राज्य के गैर मुस्लिमों के साथ हुए इस घोर अन्याय के लिए अविलंब माफ़ी मांगनी चाहिए।
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