September 16, 2026

*जनता दल यूनाइटेड ने की ‘राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति’ और वैज्ञानिक अध्ययन की मांग*

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​ #न्यूज़हाईलाइट्स:

👍​राष्ट्रीय गाद नीति की मांग: जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए व्यापक राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

👍​संजय झा का राज्यसभा में रुख: राज्यसभा में संजय कुमार झा द्वारा फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किए जाने के बाद गाद प्रबंधन का मुद्दा दोबारा राष्ट्रीय पटल पर आया।

👍​गाद जमाव बना बाढ़ का मुख्य कारण: गंगा में अत्यधिक गाद जमा होने से नदी की जलधारण क्षमता और गहराई कम हुई है, जिससे बिहार में बाढ़ का खतरा बढ़ता है।

👍​’नमामि गंगे’ और गाद प्रबंधन: 2016 से ही नीतीश कुमार का स्पष्ट रुख रहा है कि जब तक गाद समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक नमामि गंगे अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सकता।

👍​फरक्का बराज का वैज्ञानिक मूल्यांकन: जदयू ने मांग की है कि फरक्का बराज से गंगा के प्राकृतिक गाद-प्रवाह पर पड़े प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।

👍​बिहार के जल-अधिकार पर जोर: गंगा बेसिन और सहायक नदियों के योगदान को देखते हुए बिहार के सिंचाई व विकास से जुड़े जल-अधिकारों की अनदेखी न की जाए।

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रविन्द्र कुमार,संपादक/ पटना/ 15 सितंबर 2026 :: जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने गंगा नदी में गाद की गंभीर समस्या, फरक्का बराज के दुष्प्रभावों और बिहार के जल-अधिकारों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के दूरदर्शी दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए ‘राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति’ को समय की अत्यंत महत्वपूर्ण मांग बताया है। हाल ही में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा द्वारा राज्यसभा में फरक्का जल संधि के नवीनीकरण का विरोध किए जाने के बाद गाद प्रबंधन और बिहार की बाढ़ का मुद्दा एक बार फिर देश के राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

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👍*​गाद जमाव से घट रही नदी की क्षमता*

प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लंबे समय से यह तर्क देते रहे हैं कि गंगा की तली में भारी मात्रा में गाद जमा होने के कारण नदी उथली होती जा रही है। नदी की गहराई और जलधारण क्षमता घटने से मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी आते ही जल रिहाइशी क्षेत्रों में फैल जाता है, जिससे बिहार को हर साल विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ता है। अगस्त 2016 के नीतीश कुमार के वक्तव्य का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जब तक गाद के स्थायी प्रबंधन का वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक ‘नमामि गंगे’ जैसी महत्त्वाकांक्षी परियोजनाओं के लक्ष्य को पूर्ण रूप से हासिल नहीं किया जा सकता।

👍*​फरक्का बराज: फायदे कम, नुकसान ज्यादा*

जदयू प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2016-17 में नीतीश कुमार ने फरक्का बराज के प्रभावों को लेकर एक मुखर रुख अपनाया था। उनके अनुसार, फरक्का बराज के बनने से गंगा के प्राकृतिक गाद-प्रवाह में रुकावट आई है, जिससे फायदे की तुलना में नुकसान अधिक देखने को मिला है। इसी परिप्रेक्ष्य में नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर विशेषज्ञों की टीम द्वारा फरक्का बराज की उपयोगिता तथा गाद प्रबंधन का वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की सिफारिश की थी।

👍*​केवल तटबंध बनाना समाधान नहीं*

पार्टी का मानना है कि बाढ़ नियंत्रण को महज तटबंधों के निर्माण तक सीमित रखना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। नदी में गाद आने के मूल स्रोतों का अध्ययन, नदियों के स्वाभाविक प्रवाह को बाधित करने वाली संरचनाओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन और अविरल जलधारा को बहाल करना बेहद आवश्यक है।

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👍*​बिहार के गंगा जल-अधिकार की रक्षा*

2016 की अंतरराज्यीय परिषद बैठक का स्मरण कराते हुए राजीव रंजन ने कहा कि देश के गंगा बेसिन का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा बिहार में स्थित है। राज्य की कई सहायक नदियां गंगा के प्रवाह में अपना अहम योगदान देती हैं। इसलिए बिहार के कृषि, सिंचाई और सर्वांगीण विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए उसके जल उपयोग के अधिकारों की किसी भी स्थिति में अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

🌹*​संपादकीय टिप्पणी*🌹

​बिहार में प्रतिवर्ष आने वाली बाढ़ केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नदियों में गाद के निरंतर जमाव और असंतुलित ढांचागत संरचनाओं (जैसे बराज व तटबंध) का एक गंभीर जल-प्रबंधकीय परिणाम है। जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद के माध्यम से रेखांकित किया गया यह मुद्दा पर्यावरणीय संतुलन और राज्य के बुनियादी विकास दोनों दृष्टियों से प्रासंगिक है।

​केवल सफाई अभियानों या तटबंधों की ऊंचाई बढ़ाने से गंगा का पुनरुद्धार संभव नहीं है; जब तक नदी के स्वाभाविक गाद-प्रवाह का अंतर-राज्यीय वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं होता, तब तक बाढ़ नियंत्रण का कोई भी मॉडल अधूरा रहेगा। केंद्र सरकार को चाहिए कि वह अंतर-राज्यीय जल विवादों और आपदा जोखिमों को कम करने के लिए नीतीश कुमार द्वारा सुझाई गई ‘राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति’ और फरक्का बराज के वैज्ञानिक मूल्यांकन पर त्वरित कदम उठाए.

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रविन्द्र कुमार
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