*पटना में जीवंत हुआ निर्मल वर्मा का कालजयी नाटक “डेढ़ इंच ऊपर”; अकेलेपन और स्मृतियों के द्वंद्व की मार्मिक प्रस्तुति*

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📌 *न्यूज़ हाइलाइट्स: मंचन की मुख्य विशेषताएं*
*प्रतीकात्मक शीर्षक*: नाटक ‘डेढ़ इंच ऊपर’ उस सूक्ष्म मानसिक दूरी को दर्शाता है, जहाँ मनुष्य वास्तविकता से कटकर अपनी स्मृतियों में तैरने लगता है।
*सशक्त निर्देशन व अभिनय*: राजेश राजा के निर्देशन और एकल अभिनय ने पात्र के खालीपन और उदासी को बखूबी मंच पर उतारा।
*15 वर्षों का सफर*: पिछले डेढ़ दशक से रंगकर्म में सक्रिय ‘विश्वा’ संस्था का यह आयोजन कला के प्रति उनकी निरंतरता का प्रतीक है।
*सहयोग*: इमेजिनेशन पटना और कुंदन कुमार के विशेष सहयोग से इस नाट्य संध्या को भव्यता मिली।
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रविन्द्र कुमार, संपादक /पटना, 25 फरवरी 2026 :: राजधानी की प्रतिष्ठित नाट्य संस्था ‘विश्वा’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय नाट्य महोत्सव ‘विश्वोत्सव 2025-26’ के दूसरे दिन आज निर्मल वर्मा के प्रसिद्ध नाटक “डेढ़ इंच ऊपर” का सफल मंचन किया गया। कंकड़बाग स्थित ‘इमेजिनेशन स्कूल ऑफ ड्रामा’ के मंच पर सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मानसिक और स्वप्निल संसार की एक अनोखी यात्रा पर पहुँचा दिया।

🎭 *वास्तविकता और स्वप्न के बीच का सूक्ष्म फासला*
नाटक की कहानी एक ऐसे पात्र के इर्द-गिर्द घूमती है जो पूरी तरह ज़मीन से जुड़ा नहीं है, बल्कि वह खुद को और दुनिया को थोड़ी दूरी से देख रहा है। यह “डेढ़ इंच” की दूरी व्यक्ति के गहरे अकेलेपन और आत्ममंथन का प्रतीक है। मंच पर पात्र का संघर्ष यह दिखाता है कि कैसे स्मृतियाँ और बीता हुआ समय वर्तमान पर हावी हो जाता है, जिससे जीवन एक स्वप्निल संसार जैसा प्रतीत होने लगता है।

🛠️ *मंच परे का कौशल: टीम ‘विश्वा’ की मेहनत*
इस एकल नाटक की सफलता में मंच के पीछे की तकनीकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा:
*प्रकाश परिकल्पना*: राजीव रॉय ने प्रकाश के माध्यम से नाटक की उदासी और गहराई को जीवंत किया।
*पार्श्व ध्वनि*: राहुल आर्यन के संगीत ने दृश्यों के प्रभाव को द्विगुणित किया।
*रूप सज्जा व वस्त्र*: आदिल रशीद, आदित्य और पंकज कुमार ने पात्र के मानसिक परिवेश को शारीरिक स्वरूप दिया।
*मंच निर्माण*: सुनील जी के नेतृत्व में प्रतीकात्मक सेट तैयार किया गया।
*पूर्वाभ्यास*: शशांक शेखर और अभिषेक मेहता की देखरेख में नाटक को अंतिम स्वरूप दिया गया।
🎙️ *रंगकर्म के क्षेत्र में ‘विश्वोत्सव’ की गूँज*
निदेशक राजेश राजा ने बताया कि निर्मल वर्मा का यह लेखन जितना जटिल है, उसे मंच पर उतारना उतना ही चुनौतीपूर्ण। ‘विश्वोत्सव’ के माध्यम से पटना के दर्शकों को गंभीर और दार्शनिक विषयों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में कला प्रेमियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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