*हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रभु तारा स्कूल में कवि- सम्मेलन का आयोजन*

पटना/ 15 सितंबर 2024 :: हिन्दी दिवस के अवसर पर प्रभु तारा स्कूल , सकरी गली, tमें एक कवि- सम्मेलन का आयोजन किया गया , जिसमें कार्यक्रम के अध्यक्ष कमल नयन श्रीवास्तव सहित कई वक्ताओं ने हिन्दी को राष्ट्र भाषा बनाने की मांग की । इस कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवियों के अलावा बच्चों ने भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया । 
जय प्रकाश विश्वविद्यालय से आये ग़ज़लकार अविनाश भारती के….
“कहीं जो मुक़द्दर का मारा मिला है,
लगा कोई हमको, हमारा मिला है।”
” अपने ज़ख्मों पे मरहम लगाया करो,
गाँव अपने कभी आया-जाया करो.”शायरी पर तो श्रोता झूम उठे ।
पटना की जानी-मानी ग़ज़लकारा श्वेता ग़ज़ल ने तो अपनी ग़ज़ल का गहरा असर छोड़ा ही, साथ ही अपनी पंक्तियों -बोलना जिसको सदा मेरे लिए सम्मान है ,हिंदी भाषी होना मेरा गर्व है अभिमान है ” ने भी श्रोताओं को बहुत प्रभावित किया ।

मुजफ्फरपुर से आये जाने-माने ग़ज़लकार और कवि सम्मेलन के संचालक पंकज कर्ण ने एक तरफ़ तरन्नुम में पढ़ी अपनी ग़ज़ल से सबका मन मोह लिया तो दूसरी तरफ़ अपने शेर “सत्ता जहाँ अपराधियों की बँदगी करे ,मुमकिन है लोकतंत्र वहाँ ख़ुदकुशी करे” से आज की राजनीति पर गहरी चोट की । मगही के कवि प्रभात वर्मा ने अपनी मगही रचना से श्रोताओं पर गहरी छाप छोड़ी । भोजपुरी के कवि और गीतकार सुनील कुमार उपाध्याय ने एक तरफ़ अपनी भोजपुरी गणेश वंदना से माहौल को संगीतमय बना दिया तो दूसरी तरफ़ कोलकाता के एक अस्पताल में हुई घटना पर अपनी गंभीर कविता प्रस्तुत की । प्रभात धवन की बेटी पर आधारित कविता और मनोज कुमार उपाध्याय की कविता ‘प्रवक्ता ‘ भी बड़ी प्रभावशाली रहीं । संगीता सिन्हा, वंदना कुमारी, अखिलेश्वर प्रसाद सिन्हा आदि कवियों ने भी अपनी रचनाओं का सफल पाठ किया ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री कमल नयन श्रीवास्तव ने हिन्दी के विकास के लिए हो रहे ऐसे कार्यक्रमों और आयोजनों की सराहना की तो दूसरी तरफ़ सरकार की उपेक्षापूर्ण रवैये को भी उजागर किया। कवि सम्मेलन के पहले खंड में मौसम राज , सोनाक्षी चौधरी, सारिका कुमारी, सुहानी शर्मा, शैवी कुमारी, मानसी शर्मा, समीर कुमार, कृष कुमार, अर्चना और उज्ज्वल आदि बच्चों ने प्रभावी ढंग से अपनी कविताओं का पाठ किया और सबको चकित कर दिया । । अर्चना ने अपनी कविता में वर्षा ऋतु का वर्णन किया तो उज्ज्वल ने ‘नयी जवानी’ में अपने बचपन को याद करते हुए नयी जिम्मेदारियां एहसास कराया । कृष ने अपनी कविता ‘खिलौने की व्यथा’ से श्रोताओं पर एक अमिट छाप छोड़ी ।
समीर ने अपनी कविता में दहेज के दुष्प्रभावों से अवगत कराया तो मौसम राज ने ‘माँ’ शीर्षक कविता में माँ की ममता और स्नेह का एक प्रभावपूर्ण चित्र खींचा । सारिका ने अपनी रचना में पानी के महत्त्व को उजागर किया वहीं शैवी ने ‘तितली’ शीर्षक कविता में तितली की खूबसूरती का वर्णन किया । सोनाक्षी ने ‘हमारे शिक्षक ‘ में शिक्षक की भूमिका को प्रभावी ढंग से रखा तो मानसी ने अपनी कविता में जीवन की कठिनाइयों में निरंतर कोशिश करते रहने की प्रेरणा दी ।
इस कवि सम्मेलन में शिक्षक-शिक्षिकाओं, विद्यार्थियों और अभिभावकों की अच्छी खासी उपस्थिति और उनकी वाह-वाही ने भी कार्यक्रम को काफी सफल बना दिया कार्यक्रम के शुरु में अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य मनोज कुमार उपाध्याय ने किया तो अंत में धन्यवाद ज्ञापन विद्यालय के निदेशक मुकेश कुमार ने किया ।

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