*”बिहार के बाढ़ पीड़ितों के साथ सौतेला व्यवहार”: एजाज अहमद ने राष्ट्रीय आपदा और विशेष पैकेज पर सरकार को घेरा*

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#न्यूज़हाईलाइट्स:
👍45 लाख से अधिक प्रभावित: राज्य में बाढ़ से 45 लाख से अधिक आबादी प्रभावित, राजद ने केंद्र व राज्य सरकार पर राहत कार्यों के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
👍राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा बिहार को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने और विशेष पैकेज देने की मांग पर सरकार की चुप्पी पर सवाल।

👍समारोह व खर्च पर हमला: प्रधानमंत्री के जन्मदिन कार्यक्रमों पर करोड़ों खर्च करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह राशि सीधे बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगनी चाहिए थी।
👍केन्द्र पर सौतेले व्यवहार का आरोप: गुजरात की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि भारी संख्या में एनडीए सांसद देने वाले बिहार के साथ केंद्र सरकार भेदभाव कर रही है।
👍केंद्रीय टीम की रिपोर्ट पर सवाल: बिहार दौरे पर आई केंद्रीय कृषि मंत्री के नेतृत्व वाली जांच टीम की सिफारिशों को सार्वजनिक न करने पर आपत्ति जताई।
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रविंद्र कुमार,संपादक /पटना, 19 सितंबर 2026 :: बिहार प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राज्य में जारी बाढ़ विभीषिका और राहत कार्यों की स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद के वरिष्ठ नेता एजाज अहमद ने प्रेस बयान जारी कर आरोप लगाया कि राज्य के 45 लाख से अधिक लोग बाढ़ की आपदा से त्रस्त हैं, लेकिन ‘डबल इंजन’ की सरकार प्रभावितों को राहत पहुंचाने के बजाय केवल बयानबाजी कर जनता को भ्रमित करने में जुटी है।

एजाज अहमद ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव लगातार केंद्र और राज्य सरकार को पत्राचार कर बिहार की बाढ़ स्थिति को ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने तथा विशेष आर्थिक पैकेज की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद दोनों ही सरकारों के स्तर पर कोई ठोस पहल या गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। उन्होंने भाजपा नेताओं द्वारा अपने वेतन का अंश मुख्यमंत्री राहत कोष में देने को महज एक राजनीतिक पैंतरा करार दिया।

राजद नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर सरकार की ओर से विज्ञापनों और कार्यक्रमों पर भारी-भरकम राशि खर्च की गई, जो इस संकट के समय बाढ़ पीड़ितों का मजाक उड़ाने जैसा है। उन्होंने कहा कि यदि यह राशि सीधे बाढ़ राहत कार्यों में लगाई जाती, तो लाखों प्रभावित परिवारों को वास्तविक मदद मिलती।

केंद्र सरकार पर क्षेत्रीय भेदभाव का आरोप लगाते हुए एजाज अहमद ने कहा कि गुजरात में मामूली जलजमाव होने पर भी तत्काल केंद्रीय मदद पहुंचा दी जाती है, जबकि बिहार में भीषण तबाही के बावजूद केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार अपना रही है। उन्होंने सवाल किया कि बिहार दौरे पर आई केंद्रीय कृषि मंत्री के नेतृत्व वाली विशेष टीम की क्या रिपोर्ट रही और उसने क्या सिफारिशें कीं, इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
उन्होंने अंत में कहा कि राज्य की जनता 5 सरकार की इस संवेदनहीनता को देख रही है और केवल हवा-हवाई दावों से वास्तविक स्थिति को छिपाया नहीं जा सकता।

🌹*संपादकीय टिप्पणी*🌹
बाढ़ और प्राकृतिक आपदाएं किसी राजनीतिक बयानबाजी का विषय नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई की मांग करती हैं। बिहार हर साल बाढ़ की भारी विभीषिका झेलता है, जहां लाखों लोग अपना घर-बार गंवाने को मजबूर होते हैं। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों—जैसे केंद्रीय आकलन टीम की सिफारिशों की पारदर्शिता और राहत कोष का न्यायसंगत वितरण—पर सरकार को स्पष्टता देनी चाहिए। आपदा के समय राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र और राज्य दोनों को मिलकर प्रभावितों तक त्वरित सूखा राशन, चिकित्सा और स्थायी आर्थिक पुनर्वास पहुंचाना प्राथमिक कर्तव्य होना चाहिए।

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