*सुप्रसिद्ध अभिनेता मनोज वाजपेयी ने पटना में बिहार संग्रहालय और कालिदास रंगालय का किया भ्रमण*
रविंद्र कुमार,पटना/ 11 फरवरी 2026 :: “इतिहास के विद्यार्थी के रूप में यह मेरे लिए न केवल सुखद है, बल्कि एक अत्यंत ज्ञानवर्धक अनुभव भी है। बिहार संग्रहालय में जो कुछ भी मैंने देखा, वह विश्वस्तरीय है। इसे देखकर ऐसा महसूस हो रहा है कि ‘देर आए, दुरुस्त आए’।” ये उद्गार भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और बिहार की माटी के लाल मनोज वाजपेयी के हैं।

मंगलवार को पटना प्रवास के दौरान मनोज वाजपेयी ने राज्य की दो महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों— *बिहार संग्रहालय* (Bihar Museum) और *कालिदास रंगालय* का विस्तृत भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने बिहार के गौरवशाली अतीत को करीब से महसूस किया और राज्य के भविष्य की कलात्मक संभावनाओं पर चर्चा की।

1. *इतिहास की जीवंत यात्रा: बिहार म्यूजियम का अनुभव*
बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने अभिनेता को विभिन्न दीर्घाओं (Galleries) का भ्रमण कराया। वाजपेयी ने पाषाण काल से लेकर मौर्य, गुप्त, मगध और मुगल काल तक की ऐतिहासिक यात्रा को मूर्तियों, औजारों और प्राचीन अवशेषों के माध्यम से देखा।

*अभिभूत अभिनेता*: उन्होंने कहा कि बिहार म्यूजियम आधुनिकता और परंपरा का बेजोड़ संगम है।
*अपील*: वाजपेयी ने राज्य सरकार से विशेष आग्रह किया कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले स्कूली बच्चों को इस संग्रहालय का भ्रमण कराया जाए, ताकि वे अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास पर गर्व कर सकें।
2. *कालिदास रंगालय: रंगमंच का नया युग*
अभिनय की बारीकियां सीखने वाले कलाकारों के लिए तीर्थ माने जाने वाले कालिदास रंगालय का दौरा कर अभिनेता भावुक और उत्साहित नजर आए। वहां चल रहे जीर्णोद्धार (Renovation) कार्यों का जायजा लेते हुए उन्होंने कहा:
”आधुनिक तकनीक से लैस यह रंगालय बिहार के रंगमंच को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगा।”
बिहार आर्ट थिएटर के महासचिव *कुमार अभिषेक रंजन* ने बताया कि इसे केवल एक भवन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने आश्वस्त किया कि निर्माण कार्य शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।

3. *बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति: निर्माताओं के लिए ‘रेड कार्पेट’*
बिहार की नई फिल्म नीति पर चर्चा करते हुए मनोज वाजपेयी ने इसे राज्य के लिए एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा:
*प्रारंभिक जुड़ाव*: “मैं इस नीति के निर्माण के शुरुआती दौर से ही इससे जुड़ा रहा हूं। अब इसके क्रियान्वयन से देशभर के फिल्म निर्माता बिहार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।”

*रोजगार के अवसर*: उन्होंने भरोसा जताया कि बेहतर शूटिंग लोकेशंस और तकनीकी संसाधनों के विकास से स्थानीय युवाओं को अभिनय, निर्देशन और तकनीकी क्षेत्रों में बड़े अवसर मिलेंगे।

*विषयों की संपन्नता*: उन्होंने जोर दिया कि बिहार की सामाजिक और ऐतिहासिक कहानियां सिनेमा के लिए एक ‘सोने की खान’ की तरह हैं, जिन्हें वैश्विक मंच पर लाने की जरूरत है।

*स्वागत और उपस्थिति*
इससे पूर्व, बिहार संग्रहालय पहुंचने पर अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने पुष्प-गुच्छ देकर उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान विभाग के सचिव प्रणव कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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